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25 फरवरी, 2020|2:02|IST

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बंजर भूमि व कम सिंचाई में होगी मूंग की पैदावार

प्रखंड स्तर पर आम किसानों में दलहनी फसलों के प्रति अलख जगी है और उनमें मूंग की खेती से उसे लाभ हो रहा है। इस तरह की फसल को तैयार करने में उसे जहां न्यूनतम लागत वहन करनी पड़ती है, वहीं इस खेती के प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस तरह किसानों को मूंग खेती से अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इलाके के ज्यादातर किसान गेहूं फसल काटने के बाद खेतों को बंजर न छोड़कर मूंग बुआई कर समय व खेत का उपयोग करते हुए मुनाफा कमा लेते हैं। मूंग की फसल करीब 40 से 55 दिन में तैयार हो जाती है। इसे तैयार होने में कम लागत तथा सिंचाई की कम जरूरत होती है। एक बीघा खेत में करीब एक किलो बीज डालना पड़ता है। फसल तैयार होने तक सिर्फ एक बार सिंचाई करना पड़ता है। केवल दो बार लाही नामक बीमारियों से फसल को बचाने के लिए छिड़काव करना जरूरी रहता है। इस बारे में कृषि समन्वयक गुरुदयाल पासवान बताते हैं कि एक बीघा खेत में करीब 70 किलो से लेकर एक क्विंटल पैदावार होती है। जिसकी बाजार में कीमत करीब 7 से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल मिल जाती है।

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  • Web Title:Moong yields in wastelands and less irrigation