जूड़शीतल पर्व पर मिथिला में परंपरा संग उमड़ा आस्था

Newswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मिथिला का पारंपरिक लोक पर्व जुड़शीतल श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर चला। छोटे बच्चों को जल डालकर ‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद दिया गया। मंदिरों में भीड़ रही, जहां पकवान तैयार किए गए और प्राकृतिक आस्था व्यक्त की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में धुरखेल का उत्सव मनाया गया।

जूड़शीतल पर्व पर मिथिला में परंपरा संग उमड़ा आस्था

शैलेंद्र कुमार मधुबनी। मिथिला का पारंपरिक लोक पर्व जुड़शीतल श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। पूजा के बाद बड़े-बुजुर्गों ने छोटे बच्चों के सिर पर जल डालकर ‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद दिया, जो इस पर्व की प्रमुख परंपरा मानी जाती है।शहर के बसुआरा स्थित रामजानकी मंदिर सहित कई मंदिरों में महिलाओं और श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पूजा के बाद मंदिर पहुंचे बच्चों के सिर पर शीतल जल डालकर उन्हें सुख-समृद्धि का आशीष दिया गया। लोगों का मानना है कि इस दिन दिया गया आशीर्वाद पूरे वर्ष शीतलता और सुख बनाए रखता है।

मौके पर सीमा कुमारी, महंथ कौशल किशोर मंडल व अन्य थे। पर्व के अवसर पर घरों में विशेष पकवान तैयार किए गए। सुबह ही दिनभर और रात का भोजन बनाकर चूल्हे की पूजा की गई, जिसके बाद चूल्हा नहीं जलाया गया। भोजन में भात, पूरी, खीर, कढ़ी सहित कई पारंपरिक व्यंजन शामिल रहे। इसके साथ ही लोगों ने पेड़-पौधों को जल अर्पित कर प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। पितरों के निमित्त भी मिट्टी के पात्र में जल भरकर टांगने की परंपरा निभाई गई।वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में धुरखेल का उत्साह भी देखने को मिला। लोग तालाब, नदी और कुओं के पास जुटकर एक-दूसरे पर पानी और कीचड़ डालते हुए इस लोकपर्व का आनंद लेते नजर आए।

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