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8 जुलाई, 2020|4:30|IST

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भोजन नहीं मिलने पर प्रवासी मजदूरों ने किया हंगामा

भोजन नहीं मिलने पर प्रवासी मजदूरों ने किया हंगामा

प्रखंडों के क्वारंटाइन सेंटरों में अव्यवस्था को लेकर प्रवासी मुखर होने लगे हैं। हरलाखी में बंगलुरु से आए पिपरौन गांव के 30 प्रवासियों ने अपने गांव के एक प्राथमिक विद्यालय में खुद को क्वारंटाइन कर लिया। लेकिन वहां किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं देखकर हंगामा शुरू कर दिया। बंगलुरु से 1050 रुपये के ट्रेन टिकट लेकर करीब 30 मजदूर भूखे प्यासे अपने गांव पिपरौन पहुंचे। प्रवासी लोगों की शिकायत है कि रातभर न तो उन्हें खाना दिया गया और न ही कोई उनकी सुध लेने पहुंचा। रातभर उन्हें सरकारी विद्यालय क्वारंटाइन सेंटर में भूखे सोना पड़ा। इसे लेकर एक वीडियो वाइरल किया गया है जिसके सत्यता की पुष्टि हिन्दुस्तान नहीं करता है। मिली जानकारी के मुताबिक सरकार के खिलाफ विरोध जताया। मजदूरों ने बताया कि वे लोग खुद से गांव के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन हुए हैं । ताकि वे लोग अगर कोविड 19 से संक्रमित होंगे तो उसके घर परिवार के लोग भी उनसे संक्रमित न हो जाएं। हालांकि पिपरौन पंचायत के मुखिया पति यशवंत कुमार ने दिन के करीब एक बजे सोशल मीडिया में फ़ोटो पोस्ट करते हुए दावा किया कि वे मजदूरों को खाना दे रहे हैं। वहीं हिसार गांव स्थित प्रखंडस्तरीय क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों का दावा है कि घर से खाना मंगाने को मजबूर हैं। इस संबंध में बेनीपट्टी एसडीएम ने बताया कि सभी प्रवासियों को व्यवस्थित करने में प्रखंड प्रशासन जुटी हुई है। शीघ्र सभी क्वारंटाइन सेंटर को व्यवस्थित कर दिया जायेगा। बेनीपट्टी में प्रखंड स्तरीय बनाये गये क्वारंटाइन सेंटर राजकीय मध्य विद्यालय, बेनीपट्टी में बुधवार तक 49 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। सेनेटाइजर, साबुन एवं मास्क नहीं दिया गया है। आरोप है कि खाना का स्तर अच्छा नहीं है। अपराधियों की तरह व्यवहार हो रहा है। वहीं प्रखंड प्रशासन की ओर से बताया गया कि दिन में नास्ता चाय, दोपहर में भात-दाल-सब्जी और रात में रोटी-सब्जी भोजन दिया जा रहा है।

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  • Web Title:Migrant laborers created ruckus when food was not available