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नगर थाना पर तिरंगा फहराते हो गए थे शहीद

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देश को आजाद हुए 70 वर्ष पूरा होने के बाद भी शहर के शहीद गणेशी ठाकुर व अकलू साह को लोग भूल गये हैं। नयी पीढ़ी उनकी शहादत से महरूम हैं। आधे अधूरे अकलू स्थल को छोड़कर शहर में भी कुछ विशेष निसां उनके नाम नहीं है। समय-समय पर हर राजनीतिक दलों के नेता जरूरत पड़ने पर यहां आकर फूलमाला चढ़ाते रहे हैं।

लेकिन पूर्व सांसद भोगेन्द्र झा को छोड़कर किसी ने भी शहीद की सुधि लेने की जहमत नहीं उठायी है। हालांकि वर्तमान नगर परिषद के सहयोग से विधायक समीर कुमार महासेठ ने शहर में इनके नाम पर भव्य तोरण द्वार बनाने की पहल की है। इओ आशुतोष आनंद चौधरी ने बताया कि इसके लिए अभियंता से खास तौर प्राक्कलन बनाया जा रहा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 14 अगस्त को तत्कालीन हिन्दुस्तानी पार्टी के गणेशी ठाकुर व अकलू साह मधुबनी थाना पर तिरंगा फहराने के लिए जाते हुए अंग्रेजों की गोली का शिकार होकर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनके शहीद होने की खबर जिला में फैलते ही लोग और अधिक उग्र होकर अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद हुए शहर के इन दो सपूतों की याद में शहीद स्थल पर उनकी प्रतिमा लगाने का निर्णय भी लिया गया। सीपीआई व पूर्व सांसद भोगेन्द्र झा के प्रयास से जैसे-तैसे यहां स्मारक का निर्माण तो किया गया। लेकिन शहीद अकलू व गणेशी की प्रतिमा लगाने का सपना हकीकत नहीं हुआ। जिला प्रशासन की नजर से अभी भी इनका बलिदान ओझल ही है।

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  • Web Title:Martyrs were hoisted on the city police station