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मधुबनी की बेटी कल्याणी व दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन

मधुबनी की बेटी कल्याणी व दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन

संक्षेप:

मधुबनी जिले की बेटी और दरभंगा महाराज की तीसरी महारानी कामसुंदरी देवी का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की सहायता पर ध्यान केंद्रित किया। उनके निधन से मधुबनी जिले में शोक की लहर है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

Jan 12, 2026 11:42 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी,निज संवाददाता। मधुबनी जिले की बेटी व दरभंगा महाराज की तीसरी महारानी कामसुंदरी देवी के निधन से पूरा जिला मर्माहत है। वे देश में महाधिरानी की उपाधि रखने वाली अंतिम जीवित नागरिक थी। राजनगर प्रखंड अंतर्गत मंगरौनी गांव की बेटी और दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका बचपन का नाम कल्याणी था।उन्होंने सोमवार को दरभंगा स्थित राज परिसर के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही मधुबनी जिले में भी शोक की लहर दौड़ गई है, खासकर राजनगर और आसपास के इलाकों में जहां उनके मायके से जुड़ी स्मृतियां आज भी जीवित हैं।

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महारानी कामसुंदरी देवी का जन्म मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड के मंगरौनी गांव में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित और संस्कारवान परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उन्होंने बचपन से ही पारंपरिक मिथिला संस्कृति, लोकाचार और सेवा भाव के संस्कार उन्हें दिए। यही कारण रहा कि विवाह के बाद भी उनका जुड़ाव अपने मायके और मधुबनी जिले से बना रहा। दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह से विवाह के बाद महारानी कामसुंदरी देवी ने राजसी जीवन के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों को भी पूरी गंभीरता से निभाया। मधुबनी से उनका भावनात्मक रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ा। शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की सहायता से जुड़े कई कार्यों में उन्होंने मधुबनी जिले को प्राथमिकता दी। आईपीएम के चीफ एक्सक्यूटिव बीएन झा ने उनकी स्मृतियों को याद करते हुए बताया कि वे अपने पति की स्मृति में स्थापित महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” के माध्यम से भी मधुबनी क्षेत्र के कई जरूरतमंद लोगों को सहयोग मिलता रहा। सामाजिक सेवा, सादगी और संवेदनशीलता उनकी पहचान रही। डा. प्रो. विनय कुमार दास ने बताया कि आज मधुबनी ने अपनी एक ऐसी बेटी को खो दिया है, जिसने राजमहल की ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी अपने गांव और मिट्टी को नहीं भुलाया। महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।