संतुनगर-सप्ता सड़क पर चलना दूभर
मधुबनी शहर के वार्ड 12 का संतुनगर से सप्ता रहिका जाने वाला मुख्य मार्ग वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। बारिश के मौसम में सड़क पर जलजमाव और गंदगी की स्थिति गंभीर हो जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की ज़िंदगी में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों की ओर से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
मधुबनी । मधुबनी शहर के नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत वार्ड 12 का संतुनगर से सप्ता रहिका जाने वाला मुख्य मार्ग वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। विकास के दावों के बीच यह सड़क आज भी बदहाल स्थिति में है, जिससे इलाके के लोगों को रोजमर्रा के जीवन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाने के कारण लोगों के लिए पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। यह मार्ग इलाके का प्रमुख रास्ता है, जिससे प्रतिदिन हजारों की संख्या में बाइक, ऑटो, चारपहिया और अन्य छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं।
इसके बावजूद सड़क की मरम्मत और जलनिकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। बारिश के दौरान सड़क पर गंदे पानी का जमाव हो जाता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए अभिभावकों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हमेशा दुर्घटना और बीमारी का डर बना रहता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जमा गंदे पानी में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। इन मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है। बदबूदार पानी और कीचड़ से होकर आने-जाने में लोगों को काफी दिक्कत होती है। कई बार बाइक और ऑटो बड़े-बड़े गड्ढों में फंस जाते हैं और चालक गंदे पानी में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कुछ मामलों में गंभीर दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। संतुनगर से सप्ता रहिका जाने वाली सड़क की जर्जर हालत के साथ-साथ नालियों की स्थिति भी बेहद खराब है। नाले टूटे हुए और कचरे से भरे पड़े हैं, जिसके कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती। नालों का गंदा पानी सड़क पर बहने लगता है, जिससे पूरे इलाके में गंदगी फैल जाती है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नालियों की सफाई और मरम्मत नहीं कराई जाती।इसी समस्याओं को लेकर स्थानीय लोग एकजुट होकर नगर निगम के कार्यों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि इलाके में आकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं। सड़क, नाला, पेयजल और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि अपने वादों को भूल जाते हैं। न तो इलाके का हाल जानने आते हैं और न ही समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं। स्थानीय निवासी एमडी सलमान, सचिन कुमार, दानिश कुमार, रूपेश कुमार और अखिलेश यादव का कहना है कि निगम चुनाव के समय पेयजल संकट को देखते हुए टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती थी। लेकिन वर्तमान समय में पेयजल की शिकायत के बावजूद पानी टैंकर नहीं भेजे जाते। मजबूरी में लोगों को दूसरों के घरों से पानी लाना पड़ता है या बाजार से खरीदकर पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।वहीं, साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड 12 के कई इलाकों में महीनों तक कूड़ा-कचड़ा नहीं उठाया जाता। गलियों और सड़कों के किनारे कचरे का ढेर लगा रहता है, जिससे तेज दुर्गंध फैलती है। इस रास्ते से गुजरना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है और आसपास के घरों में रहना भी दुश्वार हो जाता है। कचरे में पनपने वाले मच्छर और कीड़े-मकोड़े लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।इलाके के लोगों की मांग है कि संतुनगर से सप्ता रहिका जाने वाली सड़क की तत्काल मरम्मत कर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। साथ ही जलजमाव की समस्या को खत्म करने के लिए नालियों की सफाई और पुनर्निर्माण किया जाए। गंदे पानी से बीमारियों का खतरा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 12 में संतुनगर से सप्ता रहिका रोड की स्थिति बारिश के मौसम में बेहद बदतर हो जाती है। नाला निर्माण नहीं होने के कारण सड़कों पर महीनों तक गंदा पानी जमा रहता है, जिससे जलजमाव की गंभीर समस्या बनी रहती है। इस गंदे पानी में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है और डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। हालात इतने खराब हैं कि लोग घरों से बाहर निकलने में डरते हैं। कीचड़ और गंदगी के बीच चलना मजबूरी बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ती है। स्कूल जाने वाले बच्चे कई बार फिसलकर गिर जाते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। आरोप है कि नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस समस्या के प्रति उदासीन बने हुए हैं। चुनाव के समय किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं और न ही जलनिकासी की कोई स्थायी व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों में गहरी नाराजगी है। नगर निगम के सफाई कर्मियों द्वारा वार्डों में नियमित सफाई नहीं किए जाने के कारण आम जनता को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों और गलियों में जगह-जगह कूड़े-कचरे का ढेर लगा रहता है, जिससे वातावरण दूषित हो रहा है और दुर्गंध के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। गंदगी के कारण आसपास संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। स्थानीय लोग कई बार शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हो पाती। नियमित सफाई के अभाव में कचरे में मच्छर,मक्खियां और आवारा पशु इकट्ठे हो जाते हैंं। -----------------बोले जिम्मेदार------------------ वार्ड 12 में संतुनगर से सप्ता रहिका मुख्य सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति की जानकारी मिली है। क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने को लेकर सड़क और नाला निर्माण के लिए टेंडर पास हो चुका है। जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इलाके की साफ- सफाई को लेकर सफाईकर्मियों की नियुक्ति की गई है इलाके की साफ-सफाई को लेकर अधिकारी को निर्देश दिया गया है। वहीं, नल जल योजना को लेकर शिकायत मिलने पर तुरंत ही नल जल की कमी को दूर करने का काम किया जाता रहा है। -उमेश कुमार भारती, नगर आयुक्त,मधुबनी

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