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अतिक्रमण व गंदगी से बदहाल तालाब के अस्तित्व पर संकट, प्रशासन मौन

अतिक्रमण व गंदगी से बदहाल तालाब के अस्तित्व पर संकट, प्रशासन मौन

संक्षेप:

हरलाखी थाना चौक के निकट तालाब का सौंदर्यीकरण पिछले 6 वर्षों से लंबित है। स्थानीय लोग गंदगी और बदबू से परेशान हैं। तालाब की सफाई और विकास के लिए प्रशासनिक पहल की कमी से लोग निराश हैं। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो तालाब का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

Jan 12, 2026 05:54 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी । हरलाखी थाना चौक के निकट स्थित वह तालाब, जिसे जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सौंदर्यीकरण के लिए चयनित किया गया था, वर्षों से गंदगी और बदबूदार पानी के कारण स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि समय-समय पर इसकी बदहाली पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। थाना चौक के बीचोबीच स्थित इस तालाब को करीब 6 वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक द्वारा सौंदर्यीकरण के लिए चयनित किया गया था। हालांकि इतने वर्षों के बाद भी यह योजना धरातल पर उतर नहीं सकी।

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तीन वर्ष पूर्व हाईकोर्ट के आदेश पर तालाब किनारे से अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद दोबारा अतिक्रमण कर लिया गया। तभी से यह महत्वपूर्ण योजना अधर में लटकी हुई है। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों का कहना है कि यदि तालाब का सौंदर्यीकरण सही ढंग से कर दिया जाए, तो यह न केवल इलाके के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है, बल्कि इससे जिला प्रशासन को राजस्व की भी प्राप्ति हो सकती है। वहीं पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में इस तालाब का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है। स्थानीय मोहन भगत, भोगी राय, जीवनदेव राय, राजकिशोर भगत, भोली राय, मुकेश कुशवाहा, राजाराम चौरसिया, सत्येंद्र कुमार उर्फ सीतेश पटेल, विजय भगत, जीतन नदाफ सहित अन्य ने बताया कि इस तालाब के तट पर छठ जैसे पवित्र पर्व के दौरान पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा हरलाखी थाना स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में पूजा करने के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालु भी इसी तालाब के तट पर पहुंचते हैं। पर्व के दौरान स्थानीय लोग पूरे तालाब तट की सफाई करते हैं, लेकिन पूजा होते ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोग इसमें पॉलिथीन, घरेलू कूड़ा-कचरा और नालियों का गंदा पानी डालने लगते हैं। तालाब के तट पर मछली विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाई जाती हैं। बिक्री के बाद वे मछलियों के अवशेष तालाब में ही डाल देते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता और अधिक खराब हो रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि तालाब का पानी स्नान योग्य भी नहीं रह गया है। सरोवर पार्क की तरह हाेना था विकसित : जलजीवन अभियान के तहत बारिश के पानी को सहेजने के लिए तालाबों को संवारा जाना था। इस सूदूर गांव में इस तालाब को सरोवर पार्क की तरह विकसित करने की योजना थी। ये तालाब सरोवर पार्क की तरह विकसित होकर इलाके को एक नई पहचान दिलाती। इसको लेकर वर्षों पूर्व कवायद शुरू हुई थी। इस पहल के तहत इन तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उन्हें उनके पुराने स्वरूप में लाने के लिए जीर्णोद्धार किया जाना था। लेकिन इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। फिलहाल यह पौराणिक तालाब पूरी तरह गंदगी की चपेट में है। यदि शीघ्र ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले कुछ वर्षों में इसका अस्तित्व समाप्त होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सीमा से सटे तालाब को संवारने का कार्य शुरू नहीं होने से आस अधूरी हरलाखी पंचायत स्थित तकरीबन दो बीघा की भूमि पर फैले तालाब के जीर्णोद्धार के लिए स्थानीय सत्येंद्र राय उर्फ सीतेश पटेल, परशुराम राय, मुरली ठाकुर, बीरेंद्र राय, राजाराम चौरसिया समेत दर्जनों ग्रामीण वर्षों से संघर्ष करते रहे। तब जाकर छह वर्ष पूर्व तालाब के कायाकल्प की आस जगी। लेकिन अबतक इस दिशा में कोई विभागीय पहल नहीं हो सकी। लोग अब भी आस लगाए बैठे हैं। लोग बताते हैं जलकर के कायाकल्प हेतु कार्य स्थल पर एक टोकरी मिट्टी तक नहीं गिराया गया है। लोगों को उस वक्त काफी उम्मीदें जगी थी की सरकार के द्वारा इस पहल से क्षेत्र के विकास में चार चांद लगेंगे।लोगों का कहना है कि भारत नेपाल सीमा सटे हरलाखी में जलकर के जीर्णोद्धार से इलाके का विकास होगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। तालाब में संचय पानी से खेती करने में किसानों को भी सहयोग मिलेगा। जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। लेकिन सरकार द्वारा जीर्णोद्धार कार्य में अनदेखी किये जाने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरने लगा है। लोगों को उम्मीद भी कि मछली पालन की नए अवसर उपलब्ध होंगे। सरकारी राजस्व में वृद्धि होने संभावनाएं थी। सरकार की यह योजना परिपूर्ण होने से इलाके के लोग आर्थिक रूप से सबल होंगे। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ऐता होता नहीं दिख रहा है। लोगों में खुशहाली आएगी। जलकर का रंग रूप ही बदल जाता। ------------बोले जिम्मेदार------------------ कई बार मानक मापदंड में नहीं होने के कारण काम नहीं हो पाता है। यह देखना होगा कि तालाब की जमीन कितनी है। अगर मानक मापदंड के अनुसार होगा तो इस पर जल्द से जल्द पहल की जाएगी। बीडीओ को निर्देश देकर उक्त तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। शीघ्र ही कार्य कराया जाएगा। - शारंग पाणि पांडेय, एसडीएम बेनीपट्टी