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भुगतान अटकने से जिले में 500 से अधिक स्कूलों में आईसीटी लैब ठप

भुगतान अटकने से जिले में 500 से अधिक स्कूलों में आईसीटी लैब ठप

संक्षेप:

मधुबनी जिले में बीओओ मॉडल के तहत चल रही आईसीटी लैब गंभीर संकट में हैं। कंप्यूटर किराया और मानव बल के भुगतान में देरी के कारण 500 से अधिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा प्रभावित हो रही है। कई एजेंसियों ने न्यायालय का रुख किया है, लेकिन जिला स्तर पर विपत्र भेजने में हो रही देरी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

Jan 07, 2026 09:05 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी, निज संवाददाता। जिले में बीओओ मॉडल के तहत संचालित आईसीटी लैब इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही हैं। कंप्यूटर किराया और मानव बल के भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण न केवल संबंधित एजेंसियां परेशान हैं, बल्कि स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में आईसीटी लैब लगभग ठप हो चुकी हैं। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि 31 जनवरी 2025 तक इस मॉडल के तहत संचालित सभी आईसीटी लैब बंद कर दी जाएं और इस अवधि तक की सभी देयताओं का भुगतान संबंधित एजेंसियों को किया जाए।

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इसके लिए जिला स्तर से मूल विपत्र राज्य कार्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया। बावजूद इसके, मधुबनी जिले से कई एजेंसियों के विपत्र अब तक राज्य कार्यालय को नहीं भेजे जा सके हैं। डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने बताया कि एसएसए से इसके लिए विपत्र भेजना है। इसके लिए निर्देश दिये गये हैं। सही भुगतान मामले में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। शीघ्र विपत्र भेजवाना सुनिश्चित किया जायेगा। 500 से अधिक स्कूलों का भुगतान लंबित जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले के करीब 500 से अधिक मध्य और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस मॉडल पर आईसीटी लैब स्थापित थीं। प्रत्येक लैब में औसतन 10 से 15 कंप्यूटर लगाए गए थे। कंप्यूटर किराया प्रति माह हजारों रुपये में तय था। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में एक आईसीटी इंस्ट्रक्टर और एक नाइट गार्ड की तैनाती थी, जिनका मानदेय भी कई महीनों से लंबित है। जिले में कुल लंबित देयता की राशि करोड़ों रुपये में बताई जा रही है। भुगतान नहीं होने के कारण कई एजेंसियों ने कंप्यूटर का रखरखाव बंद कर दिया है। कहीं बिजली बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा तो कहीं सिस्टम खराब होकर बंद पड़े हैं। आईसीटी इंस्ट्रक्टरों का कहना है कि महीनों से वेतन नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कुछ ने काम पर आना भी छोड़ दिया है, जिससे छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। फक्काकशीं में चल रहा तकनीकी शिक्षा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ एजेंसियों ने भुगतान की मांग को लेकर न्यायालय का भी रुख किया है। इसके बावजूद जिला स्तर पर विपत्र भेजने में हो रही देरी पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जबकि एजेंसियों और शिक्षकों का धैर्य जवाब देने लगा है। जिले में आईसीटी लैब का उद्देश्य छात्रों को डिजिटल युग के लिए तैयार करना था, लेकिन भुगतान संकट के कारण यह सपना अधूरा नजर आ रहा है।