अधर में लटकी नहर योजना, सिंचाई संकट से जूझ रहे कैटोला के किसान
मधुबनी के कैटोला गांव के किसान सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं। पानी की कमी के कारण 100 एकड़ उपजाऊ भूमि सूख गई है। नहर निर्माण योजना वर्षों से रुकी हुई है, जिससे किसान वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे...
मधुबनी । मधुबनी के नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत कैटोला के किसान इन दिनों भीषण सिंचाई संकट से गुजर रहे हैं। गांव और आसपास की लगभग 100 एकड़ उपजाऊ भूमि पर पानी की भारी कमी के कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नहर निर्माण कार्य वर्षों से अधर में लटका होने के कारण किसान परंपरागत धान और रबी की खेती छोड़कर वैकल्पिक खेती की ओर रुख करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि पानी की अनुपलब्धता के कारण हर साल फसल का नुकसान बढ़ता जा रहा है, जिससे उनकी आमदनी घट रही है और पूरे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

कैटोला गांव के किसान शक्ति कुमार बताते हैं कि यहां के किसानों ने वर्षों से नहर निर्माण की उम्मीदें संजो रखी थीं। जयनगर से खजूरी-केशोपुर होते हुए गुजरने वाली मुख्य नहर से होकर कैटोला के खेतों से सलेमपुर बांध तक लगभग 3000 मीटर लंबी सहायक नहर बनाने की योजना 15 वर्ष पूर्व स्वीकृत हुई थी। करीब 25 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना का उद्देश्य कैटोला, सलेमपुर और आसपास के खेतों तक पर्याप्त सिंचाई सुविधा पहुंचाना था। यह योजना क्षेत्र की कृषि समृद्धि के लिए मील का पत्थर मानी जा रही थी। हालांकि, नहर निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ समय बाद ही बाधित हो गया। स्थानीय किसानों के अनुसार, मधुबनी मेडिकल कॉलेज के नगर विस्तार कार्य के दौरान नहर निर्माण रुक गया। जमीन अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह योजना बीच में ही ठप पड़ गई। वर्षों बाद भी इस योजना पर कोई गंभीर पहल नहीं की गई, जिससे यह सिर्फ कागज़ों तक सिमटकर रह गई है।आज स्थिति यह है कि किसान महंगे डीजल पंप और बोरिंग पर निर्भर होकर खेती कर रहे हैं, लेकिन डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली की अनियमित आपूर्ति उनकी परेशानियां और बढ़ा रही हैं। पानी की कमी के चलते किसान अब धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की जगह ऐसी फसलों या सब्जियों की खेती पर विचार कर रहे हैं, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है। हालांकि, सब्जी की खेती में जोखिम अधिक है और यह पूरी तरह बाजार मूल्य पर निर्भर करती है। जानकारों का कहना है कि कैटोला और इसके आसपास की भूमि अत्यंत उपजाऊ है। यदि सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाए, तो यहां धान, गेहूं, मक्का, दलहन और सब्जियों की भरपूर पैदावार संभव है। इससे न केवल किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि अधूरी पड़ी नहर योजना को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि खेती बचाई जा सके और ग्रामीण पलायन पर रोक लग सके। शक्ति कहते हैं, यदि अब भी सरकार इस पर ध्यान दे तो हमारी खेती और भविष्य दोनों बच सकते हैं। खेती की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की आजीविका, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति पर सीधा असर डाला है। आत्मनिर्भर किसान आज कर्ज में डूबे हैं और कई परिवार मजदूरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। यदि समय रहते इस संकट का समाधान नहीं किया गया, तो यह समस्या व्यापक सामाजिक संकट में तब्दील हो सकती है। समय पर सिंचाई नहीं होने से खेती प्रभावित वर्तमान समय में खेती करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का अनिश्चित होना और नहर, तालाब या पंप सेट जैसी सुविधाओं का अभाव उनके सामने सबसे बड़ी समस्या है। इसके कारण कई बार खेतों में बुआई तो हो जाती है, लेकिन समय पर सिंचाई न मिल पाने से फसलें सूख जाती हैं और खेत बिना उपज के ही रह जाते हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए उन्हें निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। डीजल पंप और बोरिंग से सिंचाई करना बेहद महंगा पड़ता है। डीजल और बिजली की बढ़ती लागत उनकी जेब पर भारी बोझ डालती है। नतीजतन, खेती से होने वाली आमदनी घटने लगी है। छोटे और सीमांत किसान तो अपनी लागत भी पूरी नहीं कर पाते, जिससे उनका कर्ज बढ़ता जाता है। पानी की समस्या ने न केवल धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलों को प्रभावित किया है, बल्कि रबी और खरीफ दोनों मौसम की पैदावार में गिरावट देखी जा रही है। इसके चलते किसानों को मजबूरी में वैकल्पिक खेती या मजदूरी की राह पकड़नी पड़ रही है।समय रहते सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो खेती की स्थिति सुधर सकती है। नहरों का निर्माण, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप किसानों के लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें भरोसेमंद सिंचाई व्यवस्था मिले ताकि वे बिना चिंता के खेती कर सकें और खेत फिर से लहलहा उठें।
बोले जिम्मेदार- कैटोला गांव के किसानों को अधूरे नहर से सिंचाई समेत हाे रही अन्य समस्याओं के बारे में जानकारी मिली है। किसानों की समस्याओं को दूर करने को लेकर संबंधित विभाग से जानकारी की जाएगी और रुके हुए योजना के कार्य को तुंरत शुरू कराया जाएगा, ताकि किसानों को खेती करने में खासा मदद मिले। -समीर महासेठ, नगर विधायक, मधुबनी

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