केनाल निर्माण के बाद शेष भूमि के लिए योजना नहीं, हो रहा अतिक्रमण
मधुबनी में तीनों केनाल के पक्कीकरण के बाद शहरवासियों को नई आवागमन सुविधा मिली है, लेकिन बची भूमि पर अवैध कब्जा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस भूमि का सही उपयोग किया जाए तो वेंडिंग जोन विकसित किया जा सकता है।
मधुबनी । निगम क्षेत्र की तीनों केनाल के पक्कीकरण के बाद जहां शहरवासियों को छोटे वाहनों और पैदल राहगीरों के लिए आवागमन की नई सुविधा मिली है, वहीं केनाल के दोनों ओर बची शेष भूमि अब एक बड़े अवसर के रूप में सामने आई है। यह भूमि वेंडर्स के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है, लेकिन अब तक इसके सुनियोजित उपयोग को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर लोग इस जमीन पर अवैध कब्जा करने लगे हैं और गंदगी व झाड़-झंखाड़ बढ़ते जा रहे हैं। यदि नगर निगम ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो भविष्य में इस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
वर्तमान में शहर की स्थिति यह है कि मुख्य सड़कों और चौक-चौराहों के किनारे अस्थायी रूप से लगने वाली दुकानों और सब्जी मंडियों के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। गंगासागर चौक, शंकर चौक, नगर निगम कार्यालय के पास, गिलेशन मंडी, गदियानी बाजार, कोतवाली चौक, जीवछ सप्ता के पास, बाटा चौक, तिलक चौक, थाना मोड़ और विद्यापति टावर चौक जैसे इलाकों में सड़कों के लगभग बीचोंबीच सब्जी मंडियां लग जाती हैं। इससे पैदल यात्रियों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि इन वेंडर्स को केनाल किनारे बची भूमि पर व्यवस्थित रूप से शिफ्ट किया जाए, तो शहर का बड़ा हिस्सा जाम की समस्या से मुक्त हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि केनाल पर भारी वाहनों की आवाजाही से इसकी संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। कई स्थानों पर केनाल की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और अंदर का ढांचा दिखाई देने लगा है। तकनीकी जानकार ई. राहुल विद्यार्थी के अनुसार, केनाल के नीचे पूरा ढांचा खोखला होता है, जिस पर केवल पीसीसी की परत डाली जाती है। यह पैदल यात्रियों और हल्के वाहनों के लिए तो सुरक्षित है, लेकिन भारी वाहनों के लिए नहीं। ऐसे में यदि केनाल के ऊपर से भारी ट्रैफिक हटाकर किनारे की शेष भूमि को वेंडिंग जोन और पैदल मार्ग के रूप में विकसित किया जाए, तो सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था में भी सुधार हो सकता है। शिवगंगा बालिका विद्यालय के बगल तथा जिला परिषद मार्केट कॉम्प्लेक्स और अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास के बीच स्थित खाली भूमि को लेकर भी नागरिकों ने सुझाव दिए हैं। राजेन्द्र प्रसाद और कुमार अवधेश का कहना है कि इन स्थानों की सफाई और सुनियोजित विकास के बाद 50 से 75 वेंडर्स को आसानी से व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं कुंदन गुप्ता, जय कुमार, अर्चना देवी, अर्जुन यादव, शंकर महतो, मो. दाउद सहित अन्य नागरिकों का मानना है कि इससे सड़क किनारे लगने वाली दुकानों का दबाव कम होगा और वेंडर्स को स्थायी आजीविका का सुरक्षित स्थान मिलेगा। भारी वाहनों से केनाल की सुरक्षा पर संकट: केनाल पर भारी वाहनों का बढ़ता दबाव अब गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। कई स्थानों पर केनाल की ऊपरी परत टूट चुकी है और अंदर का ढांचा दिखाई देने लगा है। अभियंताओं का स्पष्ट कहना है कि केनाल सड़क नहीं होती और इसके नीचे खोखला ढांचा रहता है। इस पर भारी वाहनों का चलना किसी भी समय केनाल धंसने का कारण बन सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका है। समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। खाली भूमि बन रही अतिक्रमण और गंदगी का केंद्र: एससी बालिका आवासीय विद्यालय और जिला परिषद मार्केट कॉम्प्लेक्स के बीच की खाली सरकारी भूमि आज अतिक्रमण और गंदगी का अड्डा बन चुकी है। यहां कूड़े-कचरे और झाड़-झंखाड़ का अंबार लगा है, वहीं कुछ लोगों ने इस पर अवैध कब्जा भी कर लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस भूमि की सफाई कर समुचित योजना बनाई जाए, तो यह क्षेत्र शहर के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। वेंडिंग जोन से मिल सकता है स्थायी समाधान:नागरिकों और वेंडर्स का सुझाव है कि इन खाली जमीनों पर योजनाबद्ध वेंडिंग जोन विकसित किया जाए। जिला परिषद मार्केट कॉम्प्लेक्स के पास करीब 75 वेंडर्स को और अन्य स्थानों पर लगभग 60 से अधिक वेंडर्स को आसानी से व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे सड़क किनारे लगने वाली दुकानों से होने वाला यातायात जाम कम होगा, वेंडर्स को स्थायी और सुरक्षित रोजगार मिलेगा, तथा शहर की सुंदरता और व्यवस्था दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा। अव्यवस्थित वेंडिंग और जाम का समाधान बन सकती है यह भूमि नगर निगम क्षेत्र में केनाल का पक्कीकरण जिस कदर हो रहा है, उससे कहीं अधिक तेजी से उसके किनारे बची जमीन उपेक्षा का शिकार होती जा रही है। यह शेष भूमि आज न तो सड़क का हिस्सा है, न बाजार का और न ही किसी स्पष्ट योजना का। नतीजा यह है कि कहीं अतिक्रमण पनप रहा है, तो कहीं कूड़ा-कचरा और झाड़-झंखाड़ जमा हो गया है। जबकि यही जमीन शहर की सबसे बड़ी समस्या, यानी अव्यवस्थित वेंडिंग और जाम, का स्थायी समाधान बन सकती है। शहर की मुख्य सड़कों पर सब्जी, फल और अन्य दुकानों के कारण रोजाना जाम लगता है। पैदल चलना मुश्किल हो गया है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यदि केनाल के दोनों ओर बची इस भूमि पर योजनाबद्ध वेंडिंग जोन विकसित किया जाए, तो वेंडर्स को स्थायी ठिकाना मिलेगा और सड़कें खुद-ब-खुद खाली हो जाएंगी। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि शहर की तस्वीर भी बदलेगी। चिंता की बात यह है कि केनाल पर भारी वाहनों की आवाजाही से इसकी संरचना कमजोर हो रही है। --बोले जिम्मेदार- केनाल निर्माण के बाद जो शेष भूमि बची है, वह नगर विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस भूमि का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से किया जायेगा। शहर की ट्रैफिक, अतिक्रमण और सौंदर्य से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान इसके माध्यम से होगा। नगर निगम का प्रयास है कि केनाल संरचना सुरक्षित रहे और शेष भूमि का उपयोग जनहित में हो। शीघ्र ही संबंधित विभागों से समन्वय कर ठोस योजना लागू की जाएगी। -उमेश कुमार भारती, नगर आयुक्त
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