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12 अगस्त, 2020|11:23|IST

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बररी पंचायत के विस्थापितों की जिंदगी हो गयी है पीड़ादायक

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भगवानों के नई देखल जाईत छईन। कखनो धूप में जड़बैत छइथ त कखनो पाइनक बौछार से सहनशक्ति के परीक्षा लइत छइथ। घर—दुआर के तहस—नहस क देलक। बाल—बच्चा सब आठ दिन स सड़क पर अईछ। आशा छल एक दू दिन में घर वापस भय जायब। मुदा आजुक बारिश सब आशा पर पाइन फेर देलक अइछ। यह दर्द भरी आवाजें बेनीपट्टी के बररी पंचायत के दर्जनों विस्थापित परिवारों की है। जो सड़क एवं बांध पर शरण लेकर बाढ़ का पानी घरों से हटने का इंतजार कर रहे हैं। गुरुवार को की गई पड़ताल में माधोपुर सड़क पर शरण लिये विस्थापितों की स्थिति जानने का मौका मिला। झमाझम बारिश व तेज हवा के कारण पन्नी के अंदर शरण लिये विस्थापितों में कोहराम मच गया। कोई छोटे बच्चे को लेकर पन्नी के अंदर बैठ गया तो कोई बाहर में सुखने के लिए दिये कपड़े को सिमटने में लगे रहे। दस मिनट तक अफरा तफरी के बीच झमाझम बारिश होने लगी। आधे घंटे की बारिश में पॉलीथिन समेटे दर्जनों परिवार बेदम हो गये। बिन्दे मुखिया, राम प्रसाद मुखिया, राम वरण मुखिया, शांति मंडल, रंजीत मुखिया, सुमित्रा देवी, कांति देवी सहित लगभग 20 परिवारों के चेहरे पर एक बार फिर आसमान से टपकी इस आफद से उदासी छा गयी। कहा बाबू भगवानों के हमर सब के दु:ख नई देखल जाइत छइन। दू दिन के रौद में घर किछु तरखायल छल। आशा छल की एक दू दिन में घर पर वापस भय जायब मुदा फेर स बइढ़ रहल पाइन आशा पर पाईन फेर देलक अइछ। दो दिनों से बढ़ रहा बाढ़ का पानी फिर से रौद्र रूप में है।

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  • Web Title:Life of the displaced people of Bari Panchayat has become painful