Hindi NewsBihar NewsMadhubani NewsLack of Basic Amenities in Fattepur Village Residents Face Water Crisis and Poor Healthcare
फत्तेपुर में नल-जल योजना बदहाल स्वास्थ्य उपकेंद्र का नहीं मिल रहा लाभ

फत्तेपुर में नल-जल योजना बदहाल स्वास्थ्य उपकेंद्र का नहीं मिल रहा लाभ

संक्षेप:

मधुबनी के फत्तेपुर गांव में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। नल-जल योजना, स्वास्थ्य उपकेंद्र और सड़कों की हालत दयनीय है। ग्रामीणों को पानी लाने के लिए दूर-दूर जाना पड़ता है और स्वास्थ्य सेवाएं भी अपर्याप्त हैं।

Jan 01, 2026 05:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी । मधुबनी अनुमंडल क्षेत्र के खजुरी पंचायत अंतर्गत फत्तेपुर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर नजर आ रहा है। सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच गांव की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। नल-जल योजना, सड़क, साफ-सफाई और स्वास्थ्य उपकेंद्र सह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जैसी आवश्यक सुविधाएं बदहाल स्थिति में हैं, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन लगातार प्रभावित हो रहा है। गांव की सबसे गंभीर समस्या नल-जल योजना की है। हर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन फत्तेपुर गांव की स्थिति इन दावों की सच्चाई उजागर करती है।

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ग्रामीणों के अनुसार नल-जल योजना लंबे समय से सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रही है। गांव में बिछाए गए पाइप क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लेकिन उनकी मरम्मत की ओर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। अधिकांश घरों में नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें महीनों से पानी नहीं आया है। नल अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। पानी की किल्लत के कारण ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों को दूर-दराज के चापाकलों या निजी साधनों से पानी लाना पड़ता है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब जलस्तर नीचे चले जाने से चापाकल भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में कई बार ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी दयनीय : फत्तेपुर गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र सह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर मौजूद तो है, लेकिन इसकी हालत निराशाजनक है। यहां पदस्थापित डॉक्टरों के अनुसार केंद्र केवल एक कमरे में संचालित हो रहा है। कागजों में दो कमरे दर्शाए गए हैं, लेकिन उनमें से एक कमरा जर्जर अवस्था में होने के कारण बंद पड़ा है। कमरे की खिड़कियां पूरी तरह टूटी हुई हैं, जिससे सुरक्षा और स्वच्छता पर सवाल खड़े होते हैं। वेलनेस सेंटर में मरीजों के लिए न तो पर्याप्त बेड की व्यवस्था है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। केंद्र के बाहर शौचालय तक नहीं है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी असुविधा होती है। इन तमाम अव्यवस्थाओं के बीच किसी तरह यह केंद्र संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें निजी क्लीनिकों या दूर-दराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। बदहाल सड़कों से लोग परेशान: फत्तेपुर गांव की एक और बड़ी समस्या सड़क की बदहाली है। ग्रामीणों के अनुसार मेडिकल कॉलेज से फत्तेपुर गांव होते हुए रैयाम को जोड़ने वाली मुख्य सड़क अत्यंत जर्जर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। कई बार लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं।बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे सड़क और तालाब में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है। इस दौरान गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है। स्कूली बच्चों, मरीजों और कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। खराब सड़क के कारण ग्रामीणों को वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय गांव आकर विकास के वादे तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई सुध लेने नहीं आता। योजनाओं के रखरखाव और निगरानी के अभाव में गांव की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। फत्तेपुर गांव की मौजूदा हालत यह गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कब और कैसे पहुंचेगा। स्वास्थ्य उपकेंद्र में शौचालय की व्यवस्था नहीं हाेने से परेशानी फत्तेपुर गांव स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र सह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव सामने आ रहा है। सबसे गंभीर समस्या यहां शौचालय की व्यवस्था नहीं होना है, जिसके कारण मरीजों से लेकर सेंटर में कार्यरत डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ तक सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य उपकेंद्र में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज, खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शौचालय के अभाव में अत्यधिक असहज महसूस करते हैं। कई बार मरीजों को मजबूरी में बाहर खुले में जाना पड़ता है, जिससे न केवल उनकी गरिमा प्रभावित होती है बल्कि संक्रमण फैलने का भी खतरा बना रहता है। गंभीर हालत में आए मरीजों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक साबित होती है।सेंटर में कार्यरत डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि शौचालय नहीं होने से उनके दैनिक कार्य में भी बाधा उत्पन्न होती है। लंबे समय तक ड्यूटी के दौरान बाहर शौचालय की तलाश करना पड़ता है, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है, क्योंकि स्टाफ को सेंटर छोड़कर बाहर जाना पड़ता है।

बोले जिम्मेदार-फतेपुर की समस्याओं से संबंधित कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। जैसे ही इस संबंध में लिखित सूचना या शिकायत प्राप्त होगी, मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर सड़क मरम्मत और नल-जल व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा। -चंदन कुमार झा, सदर एसडीएम