Hindi NewsBihar NewsMadhubani NewsJhajharpur Railway Station Lacks Basic Amenities Passengers Risk Lives Crossing Tracks
झंझारपुर में फुटओवरब्रिज नहीं रेल यात्रियों को होती है असुविधा

झंझारपुर में फुटओवरब्रिज नहीं रेल यात्रियों को होती है असुविधा

संक्षेप:

झंझारपुर रेलवे जंक्शन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। फुट ओवर ब्रिज की कमी के कारण यात्रियों को रेलवे पटरियां पार करनी पड़ती हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में होती है। विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह स्थिति अत्यंत कठिन है। रेलवे प्रशासन ने सुधार के लिए प्रस्ताव भेजा है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

Jan 02, 2026 04:28 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
share Share
Follow Us on

मधुबनी । मिथिलांचल के हृदय स्थल और दरभंगा–सहरसा रेलखंड के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण झंझारपुर रेलवे जंक्शन पर आधुनिकता के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। एक ओर भारतीय रेल खुद को विश्वस्तरीय बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर झंझारपुर स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव यात्रियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। स्टेशन की सबसे गंभीर समस्या फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) का न होना है, जिसके चलते प्रतिदिन हजारों यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए रेलवे पटरियां पार करने को मजबूर हैं। रेल नियमों के अनुसार पटरियां पार करना दंडनीय अपराध है, लेकिन ट्रेन पकड़ने की मजबूरी में यात्री हर दिन कानून और सुरक्षा, दोनों से समझौता कर रहे हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

प्लेटफार्म बदलने की जद्दोजहद, मौत को मात देते यात्री: झंझारपुर जंक्शन पर कुल तीन प्लेटफार्म हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इन प्लेटफार्मों को आपस में जोड़ने के लिए कोई सुरक्षित और सुगम व्यवस्था नहीं है। स्टेशन से रोजाना बड़ी संख्या में लंबी दूरी की और पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन होता है। जब भी कोई ट्रेन प्लेटफार्म संख्या दो या तीन पर आती है, तो यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच जाती है। भारी सामान, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पटरियां पार करना यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण परीक्षा से कम नहीं होता। रेलवे के सुरक्षा मानकों के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। समय पर सही प्लेटफार्म तक पहुंचना यहां यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बनी ‘अग्निपरीक्षा’:स्टेशन की यह अव्यवस्था सबसे अधिक वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों पर भारी पड़ रही है। व्हीलचेयर या बैसाखी के सहारे चलने वाले लोगों के लिए एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार देखा गया है कि ट्रेन आने के समय सहयात्री किसी तरह दिव्यांग यात्रियों को उठाकर पटरियां पार कराते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पटरियों के बीच फैले ऊबड़-खाबड़ पत्थरों के कारण कई यात्री गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। स्टेशन परिसर में चेतावनी बोर्ड लगे हैं कि पटरियां पार करना मना है, लेकिन सवाल यह है कि जब कोई सुरक्षित विकल्प ही मौजूद नहीं है, तो यात्री आखिर जाएं तो जाएं कहां? मजबूरी में नियमों का उल्लंघन यहां आम बात बन गई है। आमान परिवर्तन में चूक, छह वर्षों से खामियाजा भुगत रहे यात्री: आमान परिवर्तन के नाम पर झंझारपुर स्टेशन का कायाकल्प तो किया गया, लेकिन रेलवे इंजीनियरों की एक गंभीर चूक आज हजारों यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। प्लेटफार्म निर्माण के दौरान इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया कि प्लेटफार्म संख्या एक से दूसरे प्लेटफार्मों तक यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही कैसे होगी। इसी अदूरदर्शिता का खामियाजा पिछले छह वर्षों से आम जनता भुगत रही है। हैरानी की बात यह है कि झंझारपुर स्टेशन पर अन्य आधुनिक स्टेशनों की तरह अंडरग्राउंड रास्ता (सब-वे) तो बनाया गया, लेकिन उसे मुख्य प्लेटफार्म यानी प्लेटफार्म संख्या एक से जोड़ा ही नहीं गया। निर्माण के समय अधिकारियों द्वारा यह रास्ता सीधे प्लेटफार्म संख्या दो और तीन पर खोल दिया गया। नतीजतन, यात्रियों के लिए प्लेटफार्म एक से दो या तीन तक सुरक्षित पहुंचना संभव ही नहीं हो पाता। मजबूरन यात्रियों को पटरियां पार करनी पड़ती हैं।आमान परिवर्तन के बाद जब ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ, तभी से स्थानीय लोगों और यात्रियों द्वारा इस तकनीकी खामी की ओर रेलवे प्रशासन का ध्यान दिलाया जा रहा है, लेकिन अब तक इस बुनियादी गलती को सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यदि अंडरग्राउंड रास्ते को प्लेटफार्म संख्या एक से जोड़ दिया जाता, तो आज बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को अपनी जान जोखिम में डालकर पटरियां पार नहीं करनी पड़तीं। रेलवे के सुरक्षा नियम यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करते हैं, लेकिन झंझारपुर स्टेशन पर यह नियम केवल कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। यात्रियों का कहना है कि जब तक फुट ओवर ब्रिज या अंडरग्राउंड रास्ते का विस्तार कर इस बुनियादी कमी को दूर नहीं किया जाता, तब तक यहां किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना रहेगा। स्टेशन पर अन्य सुविधाओं के नाम पर भी हो रही खानापूर्ति फुट ओवर ब्रिज ही नहीं, स्टेशन पर अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल है। प्लेटफार्मों पर पर्याप्त शेड न होने के कारण यात्रियों को चिलचिलाती धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे खड़ा होना पड़ता है। पेयजल की व्यवस्था भी नाकाफी है। सुलभ शौचालयों की गंदगी और प्लेटफार्म पर बैठने के लिए बेंचों की कमी यात्रियों की परेशानी को और बढ़ा देती है। यात्रियों के अनुसार, रात के समय प्लेटफार्मों पर समुचित रोशनी की व्यवस्था न होने से सुरक्षा का खतरा भी बना रहता है। व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर:झंझारपुर जंक्शन केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लिए व्यापार का केंद्र भी है। सुविधाओं के अभाव के कारण लोग इस स्टेशन का उपयोग करने से कतराने लगे हैं। व्यापारियों के अनुसार, यदि स्टेशन पर लोडिंग-अनलोडिंग और आवागमन की बेहतर सुविधा हो, तो स्थानीय व्यापार को काफी गति मिल सकती है। सुविधाओं के अभाव में यात्रियों की घटती संख्या प्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। ऐसा नहीं है कि रेलवे प्रशासन इस समस्या से अनभिज्ञ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, झंझारपुर स्टेशन के सुंदरीकरण और फुट ओवर ब्रिज के निर्माण का प्रस्ताव वर्षों से फाइलों में धूल फांक रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार रेल मंत्रालय और मंडल रेल प्रबंधक को इस बाबत पत्र लिखे हैं। हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन कार्य धरातल पर नहीं उतरता। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, रेलवे केवल आय बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, जबकि यात्री सुरक्षा और सुविधाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। -------------बोले जिम्मेदार------------- यात्रियों की सुविधा हेतु झंझारपुर स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज निर्माण का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। झंझारपुर को 'अमृत भारत स्टेशन योजना' में शामिल किया गया है, जिससे स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और सारी समस्या का समाधान हो जाएगा। -ज्योति प्रकाश मिश्रा, डीआरएम, समस्तीपुर