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दस सालों से सुर्खियों में रही है बाबूबरही सीएचसी

बाबूबरही सीएचसी विगत दस सालों से सुर्खियों में रही है। यहां जांच व कार्रवाई करने का खेल वर्षों से चल रहा है। तीन साल में एक बार गठित होने वाली रोगी कल्याण समिति दो बार बदली। सीएचसी की समस्याएं व इसकी समिति का मौजूदा हाल अमूमन यही बयां करता है। चूंकि, रोगी कल्याण समिति की बैठक पंजी पर सदस्य का फर्जी सिग्नेचर का फायदा उठा लिया गया और इस मामले में सीएस अमरनाथ झा द्वारा फिलहाल जांच व कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया गया है। इस मामले को उन्हीं ने बाहर निकाले थे और तब भी यह मामला सामने आया था कि रोगी कल्याण समिति की बैठक जब भी हुई है। उसका कोई अनुपालन नहीं हुआ। सदस्यों के द्वारा उठाए गए मुद्दे अनसुनी होते रहे हैं। वर्ष 2012 से ही जांच करने, दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई के मुद्दे उठते रहे हैं। तत्कालीन डीएम पंकज कुमार ने 22 लाख की लागत से भवन जीर्णोद्धार कार्य, करोड़ से अधिक की राशि जो जेबीएसवाई, दवा, ऑपरेशन, प्रखंड दफ्तर से एम्बुलेंस की हैंडओवर, खून, मल-मूत्र जांच, एक्स-रे, जेनरेटर, पेयजल, शौचालय आदि मदों की थीं उसमें भारी पैमाने पर अनियमितता बाहर आई थी। जीर्णोद्धार के मामले में त्वरित कार्रवाई हुई थी। यही कि, इसके संवेदक तत्कालीन पंचायत सचिव को सस्पेंड किया गया था। स्वास्थ्य सेवाओं के मामलों में तत्कालीन प्रभारी डॉक्टर ए. के. झा, तत्कालीन लिपिकों क्रमशः संजय झा, त्रिवेणी कांत झा, भगवान गोस्वामी, महेश्वर मिश्र सहित अन्य के आरोपों की जांच हुई, जो सब सही पाई गई। पूर्व डीएम वार्ड सदस्य काशी सिंह के संबंधित शिकायतों की जांच की थी और कार्रवाई की थी। प्रखंड से एम्बुलेंस सीएचसी को सुपुर्द किया गया। भूपट्टी के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र यादव ने सीएस को आवेदन देकर 2013 में आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा प्रसव व ऑपरेशन के 300 प्रोत्साहन भुगतान पर सवाल उठाया। तत्कालीन सीएस ने इसकी जांच कराई। जन्म व मृत्यु के लिंग अनुपात के दर को किस तरह से ताक पर रखकर प्रसव-ऑपरेशन किया गया था, जो सब जांच में बाहर निकले। हालांकि, पूर्व व वर्तमान के प्रभारी डॉक्टर एसएस मेहता ने थाने में अप्रैल 2013 में मामले की एफआईआर दर्ज कराई। तब इसका भारी विरोध हुआ था और प्रभारी डॉक्टर का झंझारपुर के लिए तबादला कर दिया गया। आरोपी डॉक्टर श्री झा को पुनः प्रभारी बना दिया गया। पूर्व डीएम द्वारा जो कार्रवाई शुरू हुई वह और सुस्त हो गई। तब जब सारे आरोपी कर्मियों को सीएचसी में तैनात किया गया। समिति की बैठक बीते सीएस की मौजूदगी में हुई तब फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया। सदस्य ने सीएस को लिखित रूप में आवेदन देकर खुलकर आपत्ति जताई थी। तब भी सीएस ने मामले की जांच करने और दोषी के विरूद्ध कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया था।

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  • Web Title:Irregularities are continuing from ten years in Babu barhi CHC