बाला पेंटिंग बच्चों के प्रारंभिक ज्ञान में बना सहायक, स्कूलों में बढ़ी उपस्थितियां
कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों में बच्चों की छुट्टी के बावजूद शिक्षकों ने दीवार चित्रकला का उपयोग करके बच्चों को शिक्षा देने का नया तरीका अपनाया। इस प्रयोग से बच्चों की उपस्थिति और शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ है। शिक्षा विभाग ने इस प्रभावी प्रयोग को सभी स्कूलों में लागू करने का निर्णय लिया है।
प्रो. मदन कुमार झा, बेनीपट्टी । कोरोना वर्ष में स्कूलों में बच्चों के लिए दिया गया अवकाश शिक्षा जगत के लिए एक नई सीख देने का काम किया । स्कूलों में बच्चों के लिए छुट्टी दी गयी थी पर शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्कूल आना अनिवार्य था। इस अवकाश काल में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने समय बिताने के लिए खेल-खेल में बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से दीवार चित्रकला का उपयोग किया। जो आज प्रारंभिक शिक्षा देने में आसान होने के साथ एक आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। इन छुट्टियां में पेंटिंग(बिल्डिंग एज लर्निंग एड) शिक्षा विभाग के लिए उपयोगी बन गया है।
खेल-खेल में बच्चों को शिक्षित करने का यह प्रयोग आज मॉडल बन चुका है। स्कूल की दीवारों पर बनाई जा रहा पेंटिंग बच्चों को पढ़ने एवं पढ़ाने में मदद देने के साथ ही बच्चों को स्कूल आने के लिए आकर्षित करता है। जिससे बच्चों की उपस्थिति एवं शैक्षणिक स्तर में काफी सुधार हुआ है। दीवारों पर उकेरी गई इस पेंटिंग को देखकर बच्चे लिखना-पढ़ना सीख रहे हैं। शिक्षा विभाग ने इस प्रयोग को सभी विद्यालयों में उपयोग में लाया है। कन्या मध्य विद्यालय बेहटा में दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से चित्र उकेरे कलाकारों ने बताया कि चित्रों को सजीव बनाये जाने का प्रयास किया जाता है ताकि बच्चों को समझने में परेशानी नहीं हो। विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार झा ने बताया कि विद्यालय मे भवनों की कमी से वर्ग संचालन में काफी परेशानी हो रही है। एक ही कैंपस में इंटर तक की पढ़ाई होने से दो शिफ्टों में विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। वर्ग कक्ष की कमी की जानकारी वरीय पदाधिकारियों को कई बार भेजा गया है बावजूद कोई निदान नहीं निकल पा रही है। लॉकडाउन के समय से बाला पेंटिंग की हुई शुरूआत प्रभारी बीईओ मधुकर कुमार ने बताया कि लॉकडाउन में विद्यालय बंद रहने से बच्चों का स्कूल आने पर बंदिश लगी थी। पर शिक्षकों को स्कूल आना था। इस दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने समय का सदउपयोग कर विषयवस्तु को ध्यान में रखते हुए दीवार पेंटिंग शुरू किया था। स्कूल खुलने के बाद बच्चों को पढ़ाने में यह दीवार पर बने चित्र काफी सहायक बना। जो शिक्षा विभाग के लिए प्रेरणादायक बन गया और विभाग ने अब इसे सभी स्कूलों में बाला पेंटिंग करने का निर्देश दे रखा है।

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