
धान अधिप्राप्ति शुरू,जिले में 24 किसानों से 154 एमटी धान की हुई खरीदारी
मधुबनी जिले में खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के तहत धान की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है। 24 किसान क्रय केंद्रों पर पहले दिन 154 एमटी धान की अधिप्राप्ति हुई। नमी के कारण खरीद की गति धीमी है। इस बार बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली से केवल पंजीकृत किसानों से धान खरीदी जाएगी।
मधुबनी,निज संवाददाता। जिले में खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के तहत धान की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है। जिले में विभिन्न प्रखंडों में 24 किसान क्रय केंद्रों पर पहुंचे और अपना धान बेचा है। क्रय केंद्रों पर शनिवार को पहले दिन 154 एमटी की अधिप्राप्ति की गयी। अबतक 88 सहकारिता समितियों को खरीदारी के लिए चयनित किया गया है। धान खरीदारी की शुरूआत में बासोपट्टी सबसे आगे रहा। यहां के 10 किसानों से 95 एमटी धान की खरीदारी हुई है। वहीं दूसरे नंबर पर रहे अंधराठाढ़ी में पांच किसानों से 42, खजौली के एक किसान से सात, खुटौना के एक किसान से ढाई एमटी, राजनगर के एक किसान से पांच एमटी धान की खरीदारी की गयी है।
इसके अलावे हरलाखी, जयनगर, लदनियां, मधेपुर, रहिका के किसान से धान की खरीदारी की गयी है। एसएफसी जिला प्रबंधक अजितेंद्र किशोर ने बताया कि धान खरीदारी की पूरी प्रक्रिया पर टास्क फोर्स के द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है। किसान व समितियों को परेशानी न हो और पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया पूरी हो, इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। नमी के कारण जिले में खरीदारी की गति प्रभावित पैक्स व व्यापार मंडलों ने धान खरीद शुरू कर दी है, लेकिन नमी के कारण खरीद की रफ्तार अपेक्षित नहीं है। किसानों के खेतों में धान की कटनी कुछ इलाकों में पूरी नहीं हुई है, जबकि जहां कटनी हो गई है, वहां नमी की उच्च मात्रा खरीद प्रक्रिया धीमी है। जिले के कई क्रय केंद्रों पर अभी केवल तैयारी का कार्य चल रहा है। भुगतान व्यवस्था को लेकर सहकारिता विभाग ने निर्देश दिया है कि किसानों को साधारण धान के लिए 2369 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि अधिकतम 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जाए। संभावना है कि जिले में अगले 15 से 20 दिनों में खरीद गति पकड़ लेगी। किसानों को भुगतान निर्धारित समयसीमा के भीतर ही किया जाएगा। पंजीकृत किसानों से ही होगी खरीदारी इस बार पूरी प्रक्रिया बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। केवल पंजीकृत किसानों से ही धान की खरीद की जाएगी। पिछले साल सरकारी प्रक्रिया से किसानों में नाराजगी थी और कई किसानों ने पेमेंट में देरी के कारण धान बिचौलियों को बेच दिया था। खरीदारी की प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। इस बार पूरी प्रक्रिया बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष धान खरीद के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने अभी तक जिला या पैक्स स्तर पर लक्ष्य तय नहीं किया है। यहां पर जिला टास्क फोर्स ने 88 पैक्स का चयन कर धान अधिप्राप्ति की अनुशंसा की है। प्रत्येक चयनित पैक्स को 270 क्विंटल धान खरीद के लिए द रहिका सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक द्वारा कैश क्रेडिट ऋण स्वीकृत की प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि बैंक के माध्यम से दिये जाने वाले सीसी में समितियों से राशि की उगाही होने, सीसी देने में कर्मियों व पदाधिकारियों की मनमानी किये जाने जैसी शिकायत लगातार मिलती रही है। इसका परिणाम हुआ है कि हर साल करोड़ों रुपए बैंक का इन समितियों के पास फंस जाता है। जानकारी केअनुसार जो समिति खरीदारी नहीं कर सीसी के दुरुपयोग करने का काम करता है, उसके साथ कर्मी डिलिंग कर राशि का भुगतान करता रहा है। निर्देश के अनुसार, रैयत किसानों से अधिकतम 250 क्विंटल और गैर-रैयत किसानों से 100 क्विंटल तक धान खरीदा जाएगा। वहीं खरीद के बाद 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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