शहर के बड़े अस्पतलों में आग बुझाने के नहीं है उपाय, फायर एक्सटिंग्विशर फेल
मधुबनी में अस्पतालों में फायर सुरक्षा की चिंताएं, फायर एक्सटिंग्विशर की समय सीमा समाप्त, उपकरणों की जांच और सालाना रिफिलिंग की जरूरत, फायर ड्रिल की ट्रेनिंग की मांग

मधुबनी,एक संवाददाता। शहर के गौशाला रोड स्थित आसपास दो बड़े निजी अस्पतालों में सुरक्षा की मानकों का पालन नहीं हो रहा है। अस्पताल में लगे फायर एक्सटिंग्विशर की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, फिर भी दिखाने के लिए लगाकर छोड़ दिसा गया है। चौबिसों घंटे संचालित होने वाले इस अस्पताल में अगर अचानक इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट से आग लग जाए तो हालात भयावह हो सकते हैं। एक्सपायर्ड उपकरण से आग पर काबू पाना मुश्किल होगा। जिसका खामियाजा भर्ती मरीजों व उसके परिजनों को भुगतना पड़ेगा। मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में हुए हादसे से सबक लेते हुए जिले के सभी निजी व सरकारी अस्पतालों को फायर सेफ्टी ऑडिट कराना बेहद जरूरी हो गया है।
बिहार फायर सर्विस एक्ट के तहत अस्पतालों में फायर एनओसी, चालू हालत में फायर एक्सटिंग्विशर , स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य हैं। हर 6 महीने में उपकरणों की जांच और सालाना रिफिलिंग जरूरी है। स्टाफ को भी फायर ड्रिल की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। जिला प्रशासन को चाहिए कि सभी अस्पतालों की औचक जांच कराए। मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अस्पताल प्रबंधन तुरंत एक्सपायर्ड सिलेंडर बदलवाएं और फायर सेफ्टी मानकों को सख्ती से लागू करें। एक छोटी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है।
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