
ईपीएफ अंशदान जांच पर शिक्षा विभाग ने जिलों से रिपोर्ट मांगी
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के ईपीएफ अंशदान पर रिपोर्ट मांगी है। सितंबर 2020 से हर महीने 1800 रुपये की कटौती होनी थी। अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर जानकारी और शपथपत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
मधुबनी,निज संवाददाता। स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के ईपीएफ अंशदान को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से त्वरित रिपोर्ट मांगी है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम विधान मंडल के चालू सत्र में उठे सवालों के बाद उठाया गया है। विभाग को यह जानकारी चाहिए कि शिक्षकों के वेतन से हर महीने की जाने वाली ईपीएफ कटौती और सरकार की ओर से दिया जाने वाला अंशदान सही तरीके से संबंधित ईपीएफ खातों में जमा हुआ है या नहीं। निदेशालय के अनुसार सितंबर 2020 से अब तक प्रत्येक शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष के वेतन से प्रतिमाह 1800 रुपये की ईपीएफ कटौती होनी थी।
इसके साथ ही सरकार की ओर से भी तय अंशदान ईपीएफ खाते में जमा किया जाना था। इसी को लेकर अब सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को अपने-अपने जिले की स्थिति की पूरी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। कटौती राशि खाता में जमा कराना अनिवार्य शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि 24 घंटे के भीतर यह जानकारी उपलब्ध करानी होगी। केवल रिपोर्ट ही नहीं बल्कि एक शपथपत्र भी देना अनिवार्य किया गया है। शपथपत्र में यह प्रमाणित करना होगा कि जिले के अंतर्गत कार्यरत सभी स्थानीय निकाय शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों की कटौती की गई राशि और सरकारी अंशदान सही खाते में जमा कर दिया गया है। विभाग ने इस मामले को अत्यंत जरूरी बताया है। अधिकारियों को चेताया गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि शिक्षकों के हितों की पूरी तरह सुरक्षा हो सके। डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने बताया कि संबंधित रिपोर्ट शीघ्र तैयार करने का आदेश सभी संबंधित को दिया गया है, ताकि ससमय विभाग को रिपोर्ट भेजी जा सके।

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