
नट समुदाय के बच्चों की शिक्षा अब भी सपना, बुनियादी सुविधाओं से वंचित
घोघरडीहा में नट समुदाय के बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। गरीबी, पहचान दस्तावेजों की कमी और जातीय भेदभाव के कारण वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सरकारी योजनाओं से अज्ञातता और रोजगार की कमी ने उनके हालात को और खराब कर दिया है। नतीजतन, बच्चे खेलकूद में या मजदूरी में समय बिता रहे हैं।
घोघरडीहा। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी नट समुदाय के बच्चे शिक्षा के अधिकार से कोसों दूर है। घोघरडीहा नगरपंचायत के वार्ड न 10 भुतही बलान तटबंध पर लगभग 10 परिवार निवास करते हैं, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझती है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के बावजूद यहां के बच्चे स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वजह गरीबी, भूमि का अभाव, आधार, राशन कार्ड जैसी आवश्यक पहचान की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं से दूरी और समाज में फैली जातीय भेदभाव की दीवारें। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नजदीक कोई सरकारी समर्पित विद्यालय नहीं है, जबकि निजी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा अधिक और प्रोत्साहन बेहद कम होने के कारण उनके बच्चे प्रवेश नहीं ले पाते।
नतीजा स्कूल जाने की उम्र में बच्चे या तो खेलकूद में समय बिताते हैं या फिर कुछ बड़े होने पर मजदूरी व अन्य कार्य में लग जाते हैं। 70 वर्षीय अकबर नट बताते हैं कि हमलोग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। बच्चों की शिक्षा न होने का मुख्य कारण गरीबी, परिजनों में जागरूकता की कमी और समाज द्वारा की जाने वाली उपेक्षा है। उनका कहना है कि वंचित वर्ग के बच्चों के प्रति समाज का दृष्टिकोण आज भी संकीर्ण है, जिससे बच्चे हीन भावना के शिकार हो जाते हैं। पहले नट समुदाय के लोग सांध, भैंसा पालकर किसानों के पशुओं का निषेचन कार्य कर जीविकोपार्जन करते थे, लेकिन सरकारी अस्पतालों में कृत्रिम गर्भाधान व्यवस्था आने के बाद यह रोजगार भी खत्म हो गया। आज हालात ऐसे हैं कि रोजगार की कमी के कारण कुछ लोग नशे के कारोबार की ओर मुड़ गए हैं।

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