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सात बजे सुबह से दो बजे तक काम का निगम वाहन चालकों ने किया विरोध

सात बजे सुबह से दो बजे तक काम का निगम वाहन चालकों ने किया विरोध

संक्षेप:

मधुबनी में ई-रिक्शा और टीपर चालकों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ बैठक की और काम की अवधि बढ़ाने तथा सुविधाओं की कमी पर विरोध जताया। चालकों ने पहले 7 से 12 बजे तक काम किया, लेकिन अब यह बिना सहमति के 2 बजे तक बढ़ा दिया गया है। वेतन और बुनियादी सुविधाओं की मांग भी की गई।

Dec 08, 2025 12:05 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी, निज संवाददाता। नगर निगम क्षेत्र में कचरा संग्रहण कार्य में लगे ई-रिक्शा और टीपर चालकों ने रविवार को टाउन क्लब फील्ड में एकजुट होकर बैठक की और सुविधाओं की कमी तथा कार्य अवधि बढ़ाए जाने के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। बैठक के दौरान चालकों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। इस बैठक में बड़ी संख्या में चालक उपस्थित रहे, जिनमें बली यादव, धर्मू महतो, दिनेश मंडल, आनंद कुमार, सुधीर महतो, शिव राम, सूरज, चंदन राय, वसंत पासवान, राजू राम, जमालुद्दीन, नौशाद, मो. मंजर, कुलदीप, नसीम राय, बिरजू राम, अमर राम, देव पासवान, राजू झा, अजय पासवान, सूरज कुमार, अंकित कुमार, राजेश पासवान, संजय दास, मनोज कुमार और गोविंद कुमार शामिल थे।

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चालकों ने बताया कि पहले उनकी कार्य अवधि सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक थी, लेकिन अब बिना किसी पूर्व सहमति के इसे जबरन दोपहर 2 बजे तक कर दिया गया है। चालकों का कहना है कि कचरा संग्रहण के दौरान अधिकांश घरों से 10 से 11 बजे तक ही कचरा निकलता है। लोग उसी समय तक गाड़ी का इंतजार करते हैं और उसके बाद कचरा निर्धारित स्थान पर रख देते हैं। ऐसे में 12 बजे के बाद किसी भी घर से कचरा नहीं मिल पाता, फिर भी दो बजे तक काम करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे चालकों में भारी आक्रोश है। समय पर नहीं मिलता है वेतन वेतन को लेकर भी चालकों ने गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 400 रुपये का भुगतान किया जाता है, वह भी समय पर नहीं मिलता। माह में केवल 26 दिनों का ही पैसा दिया जाता है, जबकि रविवार को भी उन्हें मजबूरी में काम करना पड़ता है। चालकों ने मांग की कि हर हाल में महीने की 10 तारीख तक पूरा वेतन दिया जाए ताकि उनके परिवार की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं बैठक में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चालकों ने बताया कि अब तक उन्हें न तो पहचान पत्र दिए गए हैं और न ही ड्रेस उपलब्ध कराई गई है। सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण कई बार उन्हें हाथ से ही कचरा उठाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। चालकों ने कहा कि निगम की गाड़ी चलाने के दौरान यदि कोई हादसा हो जाए, तो देखने-सुनने वाला कोई नहीं होता और उन्हें स्वयं ही सारी व्यवस्था करनी पड़ती है। खुद करानी पड़ती है वाहन की मरम्मत वाहन खराब होने की स्थिति में हालात और गंभीर हो जाते हैं। चालकों ने बताया कि पंचर या छोटी-मोटी खराबी उन्हें खुद ठीक करनी पड़ती है, जिसका कोई भुगतान नहीं दिया जाता। यदि गाड़ी में बड़ी खराबी आ जाए, तो वह 15 से 20 दिनों तक खड़ी रहती है और इस दौरान चालक पूरी तरह बेरोजगार हो जाता है। इससे उसके परिवार के सामने भूखे रहने की नौबत आ जाती है। चालकों ने मांग की कि कचरा संग्रहण कार्य को इमरजेंसी सेवा मानते हुए वाहनों की त्वरित मरम्मत की व्यवस्था की जाए। सरकारी प्रावधान के तहत मिले सुविधा बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि फिलहाल सभी चालक सुबह 7 बजे से 12 बजे तक ही काम करेंगे और दो बजे तक काम करने से हाथ खड़ा कर दिया गया है। चालकों ने मांग की कि सरकार और निगम द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं, वाहन मरम्मत के लिए तत्काल व्यवस्था बने और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा व सहायता सुनिश्चित की जाए। इसदौरान आउटसोर्सिंग के तहत कार्य कर रहे मजदूरों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। मौके पर मौजूद आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ निगम इकाई के महासचिव बबलू राम ने बताया कि संगठन सभी मजदूरों के कार्य और समस्याओं की निगरानी करेगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों का हक और उनकी सुविधाएं समय पर मिलना जरूरी है, अन्यथा संघर्ष को और तेज किया जाएगा।