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हिन्दुस्तान असर एचएम प्रभार विवाद पर डीईओ ने जारी किया सख्त आदेश
- तीन दिनों में सभी बीईओ से मांगी गई विवादित स्कूलों की रिपोर्ट
- सौ से अधिक स्कूलों में प्रभार विवाद से पढ़ाई और विकास कार्य प्रभावित
- आदेश नहीं मानने पर बीईओ के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी
मधुबनी में एचएम प्रभार विवाद
मधुबनी, निज संवाददाता। जिले के 100 से अधिक प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और अनुदानित इंटर कॉलेजों में चल रहे एचएम प्रभार विवाद को लेकर डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने सख्त रुख अपनाया है। 13 मई को हिन्दुस्तान में सौ से अधिक स्कूलों में एचएम प्रभार विवाद से पढ़ाई प्रभावित शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। इसमें जिले में कई विद्यालयों में प्रभार विवाद के कारण शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने का मामला उठाया गया था। इसके बाद डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने गंभीरता दिखाते हुए सभी बीईओ को अंतिम स्मार पत्र जारी करते हुए रिपोर्टं तलब की है। इन्होंने चेतावनी दी है कि आदेश की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जायेगी। डीईओ कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार सभी बीईओ से पूछा गया है कि उनके प्रखंड के विद्यालयों में पदस्थापित प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक अथवा वरीय शिक्षक को विद्यालय का प्रभार सौंपा गया है या नहीं। जिन विद्यालयों में अब तक प्रभार नहीं दिया गया है वहां कारण सहित विस्तृत प्रतिवेदन लौटती डाक से भेजने को कहा गया है। डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने बताया कि प्रभार को लेकर बीईओ को सख्त निर्देश दिया गया है। आदेश अनुपालन नहीं होने पर बीईओ और अन्य संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि प्रभार विवाद से संबंधित शिकायत मिलने पर संबंधित बीईओ के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदित किया जाएगा। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में विद्यालयों के विकासात्मक कार्य बाधित नहीं होने चाहिए।
विभिन्न विद्यालयों में चल रहा है विवाद
दरअसल जिले के कई सरकारी और अनुदानित विद्यालयों में लंबे समय से प्रभार को लेकर विवाद चल रहा है। कई जगह डीईओ के आदेश के बाद भी पुराने प्रभारी कार्यभार नहीं सौंप रहे हैं। इससे पढ़ाई, प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बेनीपट्टी के सीता मुरलीधर प्लस टू उच्च विद्यालय बसैठ में शिक्षक मो. कशफुदुजा और वरीय शिक्षक अनिल कुमार के बीच प्रभार को लेकर विवाद बना हुआ है। वहीं राजनगर के प्लस टू अनूप उच्च विद्यालय भटसिमरी में नए प्रभारी प्रधानाध्यापक ने पूर्व प्रभारी पर गोदरेज की चाबी और वित्तीय प्रभार नहीं देने का आरोप लगाया है। इसी तरह कलना हरलाखी अनुदानित कॉलेज, माधवपुर कॉलेज, चनौरागंज समेत कई अन्य विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में भी मामला लंबित है। जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव शंभू नाथ झा ने जिला स्तर पर स्थायी व्यवस्था लागू करने की मांग की थी।
जनगणना ड्यूटी से शिक्षकों पर बढ़ा दोहरा बोझ
जनगणना का क्षेत्र कार्य
31 मई तक प्रशिक्षण दायित्वों से मिली राहत, फिर भी बढ़ी चिंता
अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर डीईओ ने जारी किया है आदेश
फोटो मधु 9 चकदह में जनगणना करती हुई शिक्षिकाएं
मधुबनी, निज संवाददाता। शिक्षा विभाग बिहार द्वारा जारी नए निर्देश के बाद जिले के हजारों शिक्षकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। भारत की जनगणना 2027 के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य में प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को अब नियमित कक्षा संचालन के साथ-साथ जनगणना का क्षेत्रीय कार्य भी करना होगा। अपर मुख्य सचिव डा. बी. राजेन्दर ने डीएम और डीईओ को स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिक्षक विद्यालय अवधि में अध्यापन कार्य करेंगे तथा विद्यालय समय से पहले या बाद में जनगणना का फील्ड वर्क पूरा करेंगे। साथ ही 31 मई 2026 तक शिक्षकों को किसी भी अनिवार्य प्रशिक्षण कार्य से मुक्त रखने का निर्देश भी दिया गया है। इस संबंध में डीईओ अक्षय कुमार पांडेय ने इस संबंध में जरूरी निर्देश सभी को दिया है। उन्होंने बताया कि सभी बीईओ और संबंधित पदाधिकारी को इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
लगभग 15 हजार शिक्षक होंगे प्रभावित
जिले में प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को मिलाकर लगभग 18 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 12 हजार शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति जनगणना कार्य में की गई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी का दबाव बढ़ गया है। कई शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, ऑनलाइन पोर्टल कार्य, परीक्षा मूल्यांकन और प्रशासनिक दायित्वों का दबाव है। अब जनगणना का फील्ड वर्क जुड़ने से मानसिक और शारीरिक बोझ और बढ़ेगा। हालांकि जनगणना कार्य के लिए सरकार की ओर से अलग से मानदेय एवं भुगतान की व्यवस्था रहती है, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनेगा। वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनगणना कार्य का दबाव अधिक बढ़ा तो इसका असर विद्यालयों में नियमित पढ़ाई और छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
ई-शिक्षाकोष पर शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर सख्त हुआ शिक्षा विभाग
18 मई तक शिक्षक, छात्र और विद्यालय प्रोफाइल अपडेट करने का निर्देश
प्रतिदिन तीन हजार से अधिक शिक्षक ई-शिक्षाकोष पर नहीं बना रहे उपस्थिति
लाल निशान वाले प्रोफाइल तुरंत अपडेट नहीं करने पर होगी कार्रवाई
मधुबनी, निज संवाददाता। जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की उपस्थिति और प्रोफाइल अपडेट नहीं होने के मामले को हिन्दुस्तान द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। डीपीओ स्थापना की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर 18 मई 2026 तक शिक्षक, छात्र और विद्यालय से संबंधित सभी सूचनाओं को अनिवार्य रूप से अद्यतन करने का निर्देश दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि शिक्षा विभाग की सभी गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर ई-शिक्षाकोष विकसित किया गया है। इसके माध्यम से सरकारी विद्यालयों, शिक्षकों और छात्रों से संबंधित रियल टाइम डाटा उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन समीक्षा में पाया गया कि जिले के कई विद्यालयों में शिक्षक प्रोफाइल, छात्र विवरण और विद्यालय संबंधी आंकड़े अधूरे हैं। कई शिक्षकों ने अब तक मोबाइल नंबर, विषय, कक्षा श्रेणी और अन्य आवश्यक जानकारियां अपडेट नहीं की हैं। हिन्दुस्तान ने 12 मई के अंक में प्रतिदिन 3000 से अधिक शिक्षक ई-शिक्षा कोष पर नहीं बना रहे हाजिरी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर में बताया गया था कि जिले में बड़ी संख्या में शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं और कई विद्यालयों में फर्जी तरीके से हाजिरी बनाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। 9 मई को ही 3061 शिक्षकों द्वारा ई-शिक्षाकोष पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने की जानकारी सामने आई थी। रहिका, पंडौल, मधवापुर और बाबूबरही जैसे प्रखंडों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर पाई गई थी।
शिक्षक जानकारी करें अपडेट
अब विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर टीचर डिटेल्स कॉलम हरे रंग में रहने का अर्थ है कि शिक्षक की सभी जानकारियां अद्यतन हैं, जबकि लाल रंग का मतलब आवश्यक सूचनाएं लंबित हैं। ऐसे सभी शिक्षकों और विद्यालय प्रधानों को तुरंत जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथि तक प्रोफाइल और सूचनाएं अपडेट नहीं करने वाले संबंधित शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। जिला शिक्षा कार्यालय अब प्रतिदिन ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी करेगा.
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