मिट्टी व जल संरक्षण पर बच्चों के नवाचार से दिखा भविष्य का रास्ता

Dec 08, 2025 09:12 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम-2025 के तहत मधुबनी में छात्रों ने अपने नवाचारी शोध प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और समाज तथा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर समाधान खोजना था। डीपीओ कुंदन कुमार और अन्य शिक्षाविदों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की।

मिट्टी व जल संरक्षण पर बच्चों के नवाचार से दिखा भविष्य का रास्ता

मधुबनी, निज संवाददाता। बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम-2025 के तहत जिलास्तरीय परियोजना प्रस्तुतीकरण सोमवार को स्थानीय रीजनल सेकेंडरी स्कूल परिसर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर अपने नवाचारी शोध प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना तथा समाज और पर्यावरण से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का उद्घाटन डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कुंदन कुमार सहित निर्णायक मंडल के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर डा. कुंवरजी राउत, डा. आरएस पाण्डेय, प्रो डा. अरिंदम कुमार, डा. मनोज कुमार झा, ई प्रत्यूष परिमल, आरके झा, सीताराम यादव सहित कई शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

जल संकट की सुरक्षा के लिए उपाए जरूरी डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कुंदन कुमार ने कहा कि बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रोजेक्ट अत्यंत सराहनीय हैं। आज जब मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और जल संकट गहराता जा रहा है ऐसे समय में बच्चों का इन विषयों पर शोध करना आशाजनक संकेत है। उन्होंने कहा कि मिट्टी और जल संरक्षण आज एक बड़ी चुनौती बन चुका है और बच्चे अपने नवाचार के माध्यम से इसके समाधान के रास्ते बता रहे हैं। कार्यक्रम के संरक्षक डा. आरएस पाण्डेय ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों का सही प्रबंधन समय की मांग है। इस विषय पर बच्चों द्वारा किए गए प्रयोग और अध्ययन सराहनीय हैं। वहीं डा. कुंवरजी राउत ने खाद्य उत्पादन भंडारण और परिष्करण के साथ-साथ मौसम जलवायु और कृषि के संबंधों पर और अधिक कार्य की आवश्यकता जताई। नवाचार व वैज्ञानिक समझ का विकसित मंच प्रो अरिंदम कुमार ने कहा कि बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम बच्चों के लिए नवाचार और वैज्ञानिक समझ विकसित करने का एक सशक्त मंच है। यह कार्यक्रम उन्हें समस्या पहचानने और समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है। बाल विज्ञान के शैक्षणिक समन्वयक डा. मनोज कुमार झा ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है इसलिए कृषि आधारित नवाचार को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। ई प्रत्यूष परिमल ने अपने संबोधन में कहा कि बाल वैज्ञानिक ही देश और समाज का भविष्य हैं। इनके विचार और शोध आने वाले समय में नई दिशा देंगे। कार्यक्रम के दौरान डीपीओ और अन्य अतिथियों ने बच्चों के प्रोजेक्ट का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की। मौके पर नवनीत कुमार, प्रेमनाथ गोसाई, ऋषि कुमार झा, सुमित कुमार झा,अजीत कुमार झा व अन्य थे।

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