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मधुबनी की मिथिला पेंटिंग के नाम एक और उपलब्धि, क्राफ्टवाला की कहानी यूनिक 200 में

Madhubani Station (मधुबनी स्टेशन) की दीवारों पर शुरू हुआ मिथिला चित्रकला(mithila painting) के साथ प्रयोग ने मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढ़ी गांव निवासी राकेश कुमार झा को बतौर क्राफ्टवाला एक...

मधुबनी की मिथिला पेंटिंग के नाम एक और उपलब्धि, क्राफ्टवाला की कहानी यूनिक 200 में
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,मधुबनीMon, 29 Jul 2019 07:31 PM
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Madhubani Station (मधुबनी स्टेशन) की दीवारों पर शुरू हुआ मिथिला चित्रकला(mithila painting) के साथ प्रयोग ने मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढ़ी गांव निवासी राकेश कुमार झा को बतौर क्राफ्टवाला एक नई पहचान दी । इस पहचान का सफर आज मधुबनी की गलियों से निकल पटना होते हुए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के दरवाजे तक जा पहुँचा है । मंत्रालय ने देश भर के उन संस्थाओं का एक सर्वे किया है। जिन्होंने विकास के आखरी पायदान पर खड़े लोगों के जीवन मे लोक कला एवं शिल्प के माध्यम से आमूल चूल परिवर्तन लाया है । देश भर के ऐसे संस्थाओं की कहानियों में से यूनिक 200 संस्थाओं की कहानियों को संस्कृति मंत्रालय ने अपने नेशनल बुक रिपोर्ट में जगह दी है । इस नेशनल बुक रिपोर्ट में क्राफ्टवाला को जगह दी गई है ।

क्या है क्राफ्टवाला ?

क्राफ्टवाला बिहार की लोक कलाओं खास कर मिथिला चित्रकला औऱ उसके कलाकारों के लिए काम करने वाला एक स्टार्टअप है । जो लोक कला के लिए नए बाजार को ढूंढने व कलाकारों को काम मुहैया करवाने के साथ-साथ अपनी शैक्षणिक इकाई मिथिला स्कूल ऑफ आर्ट के माध्यम से लोक कलाकारों को बदलते बाजार के अनुरूप प्रशिक्षित भी करता है ।

संस्थापक राकेश झा के अनुसार मिथिला चित्रकला में चालीस हजार पंजीकृत कलाकारों की संख्या देश भर के किसी भी लोक कला के कलाकारों की संख्या में सर्वाधिक है अतः ऐसे में इन कलाकारों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती इनके पास काम का नही होना है । ऐसे में क्राफ्टवाला ने एक प्रयोग के तौर पर लोक कला में स्ट्रीट पेंटिंग कॉन्सेप्ट पर काम किया । जिसके तहत सार्वजनिक सार्वजनिक स्थलों , सरकारी भवनों की दिवालों को इस लोक कला से चित्रकारी कर सुंदर बनाया जाता है । इसका पहला प्रयोग मधुबनी रेलवे स्टेशन की दिवालों पर किया गया । उसके बाद पटना म्यूजियम के पीछे स्थित विद्यापति भवन , पटना एयरपोर्ट आदि पर भी ये प्रयोग किये गए । इस कार्य ने देश भर में ख्याति पाई और देखते देखते लोक कलाओं का चित्रण सार्वजनिक दीवारों पर होने लगा । रेल मंत्रालय के स्टेशन , ट्रेन की बोगियों के साथ साथ देश के कई शहरों के दिवालों को स्थानीय लोक कलाओं से सजाया जाने लगा । ऐसे में ना केवल मिथिला चित्रकला बल्कि अन्य राज्यों की लोक कला के कामों की मांग में जबर्दस्त उछाल आया और जो लोक कलाकार काम के अभाव में इस कला से दूर हुए जा रहे थे वो आज फिर से इस कला के माध्यम से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं । संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने क्राफ्टवाला के इन्हीं प्रयास को अपने नेशनल रिपोर्ट बुक में जगह दी है ।