700 years of records are safe - 700 वर्ष के अभिलेख हैं सुरक्षित DA Image
21 नबम्बर, 2019|9:09|IST

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700 वर्ष के अभिलेख हैं सुरक्षित

चौदहवीं शताब्दी से वर्तमान समय तक मैथिल ब्राह्मण वंश का रिकॉर्ड पंजीकार सुरक्षित रखें हुए हैं। पूर्व में पंजीकार को वंशावली कंठस्थ रहता था। काल क्रम में जनसंख्या वृद्धि होने तथा पंजी कराने की सामाजिक अनिवार्यता के कारण कई लोग आजीविका के लिए पंजीकार बन गये। पंजी प्रथा के अनुरूप अब सरकार द्वारा भी विवाह की पंजीकरण के रुप में प्रमाण पत्र दिया जाता है।

लेकिन मैथिल ब्राह्मण एवं कर्ण कायस्थ के पंजी मिलान में दो विपरित वंशजों से शादी तय करने में विवाह अधिकार के पंजीकार ही तय करते हैं। भले ही आप अपनी इच्छा के मुताबिक विवाह अपने बच्चों का तय करते हैं। लेकिन आपको मातृ पक्ष एवं पितृ पक्ष में सात पीढियों तक वैवाहिक संबंध है तो आपकी इच्छा के खिलाफ पंजीकार विवाह अधिकार को निरस्त कर देंगे।

पंजीकार विश्वमोहन मिश्र बताते हैं कि दो अलग मूल गोत्र के लोगों को वैवाहिक संबंध में सात पीढियों का मिलान पंजी अभिलेख से होता है। विज्ञान भी मानता है कि दो अलग वंश के जिन से बच्चे उत्पन्न होंगे तो अगले पीढी का बच्चा मेधावी होगा। वैज्ञानिक आधार बनाकर ही पंजी प्रथा की शुरुआत की गई थी। वर्तमान समय में भी इस वैज्ञानिक प्रमाण को जानने वाले विवाह प्रस्ताव से पूर्व पंजी का जांच कराकर ही विवाह तय करते हैं। इस प्रथा को जीवित रखने के लिए मैथिल ब्राह्मण एवं मिथिला लोक संस्कृति के सुरक्षा के पोषक लोग जागरूकता अभियान चला रहे हैं। सरकार भी सौराठ सभा के इस पंजी प्रथा को बचाने के लिए पंजी भवन बनाया है। पंजी अभिलेख के रेकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए कम्प्यूटर पर अपलोड करने के लिए जोर दे रही है। हालांकि कुछ अभिलेख अपलोड भी हुआ है। पंजीकारों को अपने इस जीविका के साधन को बचाने की चिंता है। मैथिल ब्राह्मणों में भी कुछ गिनेचुने लोग अपनी मातृभूमि की सामाजिक संस्कृति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सौराठ सभा गाछी में विचार विमर्श कर रहे हैं। इसके लिए नयी योजना भी बना रहे हैं।

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