अंतिम दिन बाबा की समाधि पर दुग्धाभिषेक
कोशी की कछार पर स्थित बाबा विशु राउत की समाधि स्थल पर 5 दिवसीय राजकीय मेला शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने दूध अभिषेक किया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिस और कार्यकर्ताओं की तैनाती की। इस मेले में विभिन्न खेल तमाशों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बने।

चौसा, निज संवाददाता। कोशी की कछार पर स्थित लोक देवता बाबा विशु राउत की समाधि स्थल पचरासी स्थान में पांच दिवसीय राजकीय मेला शनिवार की देर शाम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया है। मेला के अंतिम दिन बाबा की समाधि पर दूध अभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ देखी गई। प्रत्येक वर्ष की तुलना में इस बार पचरासी मेला काफी खास बना रहा। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर पांच दिवसीय राजकीय मेला के चौथे दिन 17 अप्रैल को बाबा का बैरागन होने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। जिला प्रशासन, सर्वोच्च कमेटी और चरवाहा कल्याण संघ के संयुक्त देखरेख में पांच दिनों तक मेला के अंतिम दिन शनिवार को भी बिहार के अलावे झारखंड, नेपाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यो के पशुपालक बाबा विशु राउत के समाधि स्थल पर दूध चढ़ने होड़ लगी रही।
दूध अभिषेक के दौरान पशुपालक दूध के साथ गांजा और बताशा भी चढाते रहे। मेला के दौरान मजिस्ट्रेट के साथ दो दर्जन से अधिक जगहों पर पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सर्वोच्च कमिटी और चरवाहा कल्याण संघ की ओर से दों सौ से अधिक कार्यकर्ता तैनात रहे। इस मंदिर की मान्यता है कि बाबा को दूध चढाने के बाद अगर उनकी कृपा हो गई तो पशुओं की परेशानी और बीमारी क्षणभर में समाप्त हो जाती है। गांव और इस इलाके के लोग इस स्थान पर जटिल से जटिल पंचायत भी करते है। यहां पर होने वाले पंचायत में गंभीर और पेंचिदा मामला भी आसानी से सुलझ जाता है। मान्यता है कि बाबा के दरवार में चढाने के लिए लाये जाने वाले कच्चा दूध अगर पवित्र बर्तन में नियम निष्ठा के साथ दूर से भी लायी जाए तो विपरीत मौसम में भी वह दूध खराब नहीं होता है। यहां प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को बैरागन होता है। पशुपालक दूध चढ़ने के बाद दही और चुरा का प्रसाद ग्रहण करते है। सप्ताह के दोनों दिन भी दुग्धाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओ की भीड़ होती है। मेला के दौरान बाबा विशु राउत की समाधि पर पशुपालकों द्वारा दूधाभिषेक किये जाने के बाद दूध की सरिता बहने की एक मनोरम दृश्य बनी रहती है। मेला में टावर झूला, ब्रेकिंग डांस, ड्रैगन ट्रेन, मौत का कुआं, जादूगर सहित तरह तरह के खेल तमाशा से जुड़ी दुकानें आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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