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कौड़ियों के भाव में धान बेचने को मजबूर किसान

कौड़ियों के भाव में धान बेचने को मजबूर किसान

संक्षेप:

ग्वालपाड़ा में धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों में मायूसी है। खुले बाजार में धान की कीमत 1200 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि पिछले साल यह 1800 रुपए में बिकता था। किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है और पैक्सों की डिफॉल्ट स्थिति के कारण उन्हें धान बेचने में समस्या आ रही है।

Dec 02, 2025 12:04 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधेपुरा
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ग्वालपाड़ा, निज प्रतिनिधि।धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों में मायूसी छायी हुई है। खुले मंडी में धान का भाव सुनकर लोगों का चेहरा मुरझा जाता है। किसान किसी कीमत पर फसलों को मंडी के हवाले नहीं करना चाहते हैं। अगर धान बेचने में देरी की तो रबी खेती के लिए खाद, बीज का जुगाड़ मुश्किल हो जाएगा। लाचार होकर किसान औने-पौने भाव में फसलों को बेचने पर मजबूर हैं। डेफरा के रामचंद्र यादव, सुखासन के चंद्रशेखर प्रसाद, बिशनपुर अरार के नारद यादव, झंझरी के किसान बिनोद यादव, मो. कियाम ने बताया कि खुले बाजार में धान 1200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है।

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जबकि पिछले साल वही धान 1800 रुपए क्विंटल के दाम में बड़ी आसानी से बिक जाता था। फिलहाल बाजार में जो भाव मिल रहा है, उससे लागत खर्च निकाल पाना मुश्किल है। व्यापारी चक्रवाती तूफान मोंथा के चलते फसलों में मीनमेख निकाल कर मुंहमांगा दाम सुना देते हैं। भंडारण की सुविधा नहीं रहने से खलिहान में रखा धान चूहे का निवाला बन रहा है। पैक्सों में सरकारी खरीद का जमीनी हकीकत भी चौंकाने वाला है। लोगों का कहना है कि वहां भी लूट मची है। चिंता की बात यह है कि प्रखंड के 5 पंचायत के किसान चाह कर भी धान को पैक्स के हवाले नहीं कर सकते हैं। कारण कि देनदारी के चलते खोखसी, पीरनगर, विषवाड़ी, सरौनी कला, और टेमाभेला पैक्स को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया है। इसके चलते उन पैक्सों को धान खरीद करने की अनुमति नहीं दी गय है। हैरत की बात यह है कि प्रशासन को उन पंचायतों के किसानों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। उन्हें खुले बाजार में व्यापारियों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। लोगों का कहना है कि डिफॉल्टर घोषित होने के कारण उन पैक्सों के किसानों को धान बेचने के लिए बगल के किसी पैक्स से टैग कर देना चाहिए। अगर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो किसान धान की खेती करने से पहले सौ बार सोचेंगे। फोटो कैप्शन - खलिहान में पड़ा धान का ढेर