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27 सितम्बर, 2020|3:18|IST

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हीमोफीलिया से बचाव को जागरूकता जरूरी

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नवजात शिशुओं के लिए हिमोफीलिया काफी घातक माना जाता है। यह खून के थक्के बनने की क्षमता को पूरी तरह प्रभावित करनेवाला अनुवांशिक रोग है। इससे बचाव के लिए गर्भधारण से पूर्व दंपती को अपनी रक्त की पूरी जांच करानी चाहिए। अनुवांशिक रोग होने के कारण यह बीमारी बच्चों को भी हो सकता है। सामान्य तौर पर यह रोग पुरुषों में अधिक पाई जाती है पुरैनी में भी इस प्रकार का मामला सामने आया है।

हिमोफीलिया दो प्रकार की होती है। इसमें शरीर में फैक्टर आठ की कमी होने से रक्त का थक्का जमने के लिए आवश्यक तत्व की कमी हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इस रोग से ग्रसित लोगों की संख्या भारत में काफी ज्यादा है। रक्तजनित रोगों से ग्रसित अधिकांश लोगों को इस रोग के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण पता नहीं चलता है। इससे बचाव के लिए गर्भधारण से पूर्व माता-पिता दोनों को अपने संपूर्ण रक्त का प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

रोग के लक्षण-शरीर पर नीले निशान बनना, आंख के अंदर रक्त स्राव, नाक से अचानक खून बहना, जोड़ों में सूजन शरीर में ऐंठन महसूस होना, अचानक कमजोरी महसूस होना, चलने में परेशानी आदि।

हीमोफीलिया रोग से बचाव के लिए लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता है। इस रोग से संबंधित किसी प्रकार के लक्षण दिखने पर अविलंब चिकित्सक से परामर्श लेनी चाहिए। साथ हीं पुरुषों महिलाओं को अपना रक्त की पूरी जांच करानी चाहिए।

— डॉ विनय कृष्ण प्रसाद,प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पुरैनी

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  • Web Title:Awareness is necessary to prevent hemophilia