
नीतीश कुमार ने रिवाइव करा दिया वरना... तेजस्वी पर चिराग का पलटवार- सौ दिन क्या 5 साल मत बोलिए
चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि जनता से दूरी और गलतबयानी के कारण उनके जनाधार की चोरी हो गई। यही हाल रहा तो अब डबल डिजिट में पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा। ने
विदेश यात्रा से लौटे राजद नेता तेजस्वी यादव ने पटना पहुंचते ही नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर जनता से वादा खिलाफी और धन के बल पर सत्ता हासिल करने का आरोप लगा दिया। केंद्रीय मंत्री सह लोजपा राम विलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार किया है। कहा है कि जनता से दूरी और गलतबयानी के कारण उनके जनाधार की चोरी हो गई। यही हाल रहा तो अब डबल डिजिट में पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी याद विधानसभा का शीतकालीन सत्र छोड़कर विदेश यात्रा पर निकल गए थे।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी वाले तेजस्वी यादव लंबे समय तक बिहार से बाहर रहे और आते-आते सरकार को चुनावी वायदे पूरे करने के लिए 100 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया। इस पर चिराग पासवान से सवाल पूछा गया तो तेजस्वी यादव को आईना दिखाने लगे। पासवान नेका कि इसी बड़बोलेपन की वजह से जनता ने ऐसी हार का मुंह दिखाया। गलत आरोप लगाते रहते हैं। ऐसा हुआ तो अगली बार डबल डिजिट में भी नहीं आएंगे। सौ दिन कुछ नहीं बोलने पर कहा कि पांच साल तक नहीं बोलें। उनके पास बोलने को कुछ है भी नहीं।
चिराग पासवान ने कहा कि इन्होंने जनादेश का अपमान कर रहे हैं। कभी ईवीएम तो कभी एसआईआर पर सवाल उठाते हैं। जहां जीत होती है वहां ईवीएम ठीक रहता है। 2010 सबको पता चल गया था कि राजद और कांग्रेस कहां है। 2015 में नीतीश कुमार ने मौका नहीं दिया होता तो कभी रिवाइव नहीं होते। 2020 में अगर हमारी पार्टी एनडीए में होती तो इन्हें अपनी स्थिति का पता चल जाता। इन्हें बैठकर पहले अपने हार की समीक्षा करना चाहिए फिर कुछ बोलना चाहिए।
ये लोग अपना जानाधार खो चुके हैं। तेजस्वी यादव के मौन रहने से इनके विधायक निराश हैं। कार्यकर्ता से कोई संवाद नहीं कर रहे हैं। वो दिन दूर नहीं जब नेता प्रतिपक्ष लायक नहीं रहें। इन्हें पहले यह बताना चाहिए कि हार क्यों हुई। 18 नवम्बर को सरकार बनाने का ऐलान कर दिया। इस अहंकार को जनता ने नकार दिया। एनडीए ने मेनिफेस्टो में जितनी वायदे किए हैं उन्हें पूरा किया जाएगा। इन्हें मौन रहने के बजाए सवाल पूछना चाहिए। सरकार जवाब देने के लिए तैयार है।





