
समय कम दिया गया, लोगों में बेचैनी है; बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर उपेंद्र कुशवाहा ने उठाए सवाल
संक्षेप: बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन पर आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को मतदाता सत्यापन के लिए समय कम मिला है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। अगर समय रहता तो प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है। लेकिन इतने कम समय में बनवाना आसान नहीं होगा।
बिहार में जारी वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमलावर है। इस सिलसिले में इंडिया अलायंस के 11 दलों को नेताओं ने इलेक्शन कमीशन में जाकर अपना पक्ष भी रखा था। अब इस मामले पर बिहार में एनडीए के सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सवाल उठाए हैं। उन्होने कहा कि वोटर लिस्ट के रिव्यू का काम कोई नया नहीं है। बहुत सारे लोग बिहार से बाहर रहते हैं, अगर उन्हें सत्यापन के लिए कहा जाएगा तो इतने कम समय में कैसे करा पाएंगे?

कुशवाहा ने कहा कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। ऐसे कई लोग हैं जो कभी स्कूल ही नहीं गए हैं, तो मैट्रिक पास होने का सवाल ही नहीं है। ना जन्मतिथि और ना ही निवास के लिए कोई दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहता तो निवास का प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता था। लेकिन इतने कम वक्त में दस्तावेज बनवाना आसान नहीं होगा।
उन्होने कहा कि चुनाव आयोग ने कुछ विलंब से इस कार्यक्रम की शुरुआत की है। लोगों के मन की आशंका को चुनाव आयोग को देखना चाहिए, और उसका हल निकालकर आगे काम करना चाहिए। बिहार में सात-आठ करोड़ मतदाता हैं और इस लिहाज से समय थोड़ा कम है। आरएलएम चीफ ने कहा कि मतदाता सूची के रिवीजन में किसी वैद्य मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए। मतदाता सूची में यदि कोई फर्जी नाम जुड़े हैं, तो निश्चत तौर पर हटाया जाए।
हालांकि एनडीए के अन्य सहयोगी दल बीजेपी, जेडीयू, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को सामान्य बता रहे हैं। और विपक्ष के आरोप को हार का डर करार दे रहे हैं। आपको बता दें राज्य में मतदाता सत्यापन का काम 25 जून से 26 जुलाई तक चलेगा। जिसमें 8 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन होना है। विपक्ष भी वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग की टाइमिंग पर सवाल खड़ा करता आया है।





