फर्जी एनकाउंटर के आरोपी को इनाम? भरत तिवारी केस पर रोहिणी आचार्या ने सम्राट सरकार से पूछा 5 सवाल
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने राजेश शर्मा को मद्य निषेध विभाग में डीएसपी बनाए जाने पर सम्राट चौधरी पर हमला बोला है। कहा है कि सरकार ने उसे पुरष्कार दे दिया जो भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर में नामजद आरोपी है।

Rohini Acharya on Bharat Tiwari: आरा के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की आंच से बिहार की राजनीति काफी गर्म है। अब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने कांड के नामजद आरोपी राजेश शर्मा को मद्य निषेध विभाग में डीएसपी बनाए जाने पर सम्राट चौधरी पर हमला बोला है। कहा है कि सरकार ने उसे पुरष्कार दे दिया जो भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर में नामजद आरोपी है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि ऊपर से आदेश मिलने पर पुलिस ने भरत तिवारी का एनकाउंटर किया।
रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अपनी बात रखी है। पूछा है कि हत्या के नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को सम्राट सरकार ने पुरस्कृत कर दिया?
जवईनिया गाँव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले, भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले युवक भरत तिवारी की फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में हत्या की गई। मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नयी जिम्मेदारी सौंपा जाना, पुरस्कृत किए जाने के समान है। सम्राट सरकार के इस हैरान कर देने वाले फैसले से ही भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों के द्वारा लगाया गया आरोप साबित होता दिखता है कि फर्जी मुठभेड़ को सत्ता शीर्ष, पुलिस उच्चाधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी।
बिहार के मुख्यमंत्री , बिहार सरकार तथा बिहार के डीजीपी से बिहार की जनता के साथ-साथ मेरा ये सीधा सवाल है कि-
मृतक के परिजनों के द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर में लगभग आधा दर्जन पुकिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाए जाने के बावजूद उनमें से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है?
नामजद आरोपियों से अब तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की गयी है?
मामले की जाँच की गति इतनी धीमी क्यों है और जाँच की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है?
क्या आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किए जाने, धीमी व् ढुलमुल जाँच का मकसद फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले 'किसी बड़े नाम'को बचाना है?
पूर्व में भी मेरे और मृतक के परिजनों के द्वारा उठाया गया अहम सवाल यथावत है कि मृतक का मोबाइल फोन कहाँ है? लगभग एक पखवारा बीत जाने के बाद भी पुलिस के द्वारा मोबाइल फोन अब तक परिजनों को क्यों नहीं सौंपा गया है?
राजेश शर्मा को डीएसपी बनाने का विरोध
राजेश शर्मा को पद से हटाकर फिर से डीएसपी बनाए जाने का कई स्तर से विरोध हो रहा है। सरकार के इस फैसले की आलोचना बी की जा रही है। राजेश शर्मा पर थानेदार रहते मुजफ्फरपुर में भी फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप है।


