Lakhisarai News: महुलिया गांव: सड़क पर जलजमाव से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी, समाधान की मांग
Lakhisarai News: - गांव में सरकारी जमीन का भी किया जा रहा अतिक्रमण, जिस वजह से होती दिक्कत, हुक्मरान बने अनजान

Lakhisarai News: चानन, निज संवाददाता। भलूई पंचायत के महुलिया गांव में बसे करीब ढ़ाई हजार लोगों को बरसात के दिनों में घुटन भरी जिंदगी जीनी पड़ रही है। सड़क पर भरे पानी से आना-जाना करना पड़ रहा है। सड़क के दोनों किनारे सरकारी जमीन पर मिट्टी जमा रहने से वर्षों से जलजमाव की समस्या बनी हुई है, जिसे देखने की फुर्सत हुक्मरानों के पास नहीं है। सड़क पर पानी जमा रहने से बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत होती है। इससे रोजमर्रा की आवाजाही बाधित होती है और समय पर पहुंचना कठिन हो जाता है। गंदे व रूके हुए पानी से मच्छर पैदा होते हैं, इससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलने की आषंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे सरकारी भूमि को अतिक्रमण कर लिए जाने की वजह से सड़क पर पानी जमा रहता है। यहां से गुजरते समय कई बार लोगों के कपड़े भी खराब हो जाते है। गांव में शिव मंदिर के पहले सड़क की स्थिति काफी खराब है। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों एव संबंधित अधिकारियों को इस बात समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक किसी के द्वारा सूध नहीं लिया गया है, जबकि गांव जाने के लिए यह प्रमुख सड़क माना जाता है।
हर घर नल जल का हाल भी खराब:
महुलिया गांव में सरकार द्वारा लोगों तक पेयजल आपूर्ति के लिए नल-जल योजना लगाई, लेकिन इस योजना की दुर्दषा किसी से छुपी नहीं है। इस योजना को धरातल पर लाने की बजाए सरकार के नमांइदे राषि के बंदबांट में लगे रहे, जिसका परिणाम है कि लोगों को मन माफिक पानी नहीं मिल पा रहे है। वार्ड नं.08 में चार साल पहले पानी टंकी वार्ड द्वारा लगाया गया था, परन्तु कायदे से कभी पानी चला ही नहीं। वर्तमान में पी.एच.ई.डी को हर घर नल की जिम्मेवारी दी गई, लेकिन यहां भी लोगों को निराशा हाथ लगी है। गांव के प्रबुद्ध समाजसेवी सह पूर्व जिप सदस्य मसूदन यादव ने कहा कि सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार हर घर नल जल योजना महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। गर्मी के सीजन में लोगों को निजी चापाकल के सहारे रहना पड़ा है। सुलेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार के लाखों खर्च के बाद भी लोगों को पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। पहाड़ी इलाका होने के कारण साधारण चापाकल काम नहीं कर पाता है। ड्रील बोरिंग कराने एवं सबमरसिबल लगवाने में 50 हजार से ज्यादा खर्च होता है, जो साधारण परिवार के लिए संभव नहीं है। टोले की 70 फीसदी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है। अधिकांश लोग कृषि कार्य कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। मवेशी को चारा पानी के लिए जंगल ले जाना पड़ता है। गांव के बगल से गुजरी कुंदर -बन्नु बगीचा नहर में पानी रहने से बरसात के दिनों में लोगों का काम चल जाता है। पेयजल के साथ ही गांव में जल निकासी की व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है। जल निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहने से बरसात में जल जमाव की समस्या उत्पन हो जाता है। इधर बीडीओ श्रवण कुमार पांडेय ने कहा कि जल निकासी की व्यवस्था सुदृढ हो इसके लिए पंचायत मुखिया से बात किया जायेगा। वहीं मुखिया प्रदीप पासवान ने कहा कि सड़क के दोनों किनारे में सरकारी जमीन अतिक्रमण के कारण सड़क पर बरसाती पानी जमा हो जाता है, जिस वजह से हर तबके के लोगों को दिक्कत हो रहे है।


