टूटी टंकी, जीर्ण -शीर्ण सड़क अधूरा नाला और जलजमाव भलूई की बन गई पहचान

टूटी टंकी, जीर्ण -शीर्ण सड़क अधूरा नाला और जलजमाव भलूई की बन गई पहचान

संक्षेप:

टूटी टंकी, जीर्ण -शीर्ण सड़क अधूरा नाला और जलजमाव भलूई पंचायत की बन गई पहचान

Aug 19, 2025 11:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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प्रस्तुति: प्रकाश मंडल। भलूई पंचायत के आदिवासी इलाके की तस्वीर अब भी घुंधली है। कछुआ गांव तक पहुंचने वाली सड़क पिछले माह टूटने से गांव तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। यहां मुख्यमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार हर घर नल जल योजना भी फलॉप साबित हो रहा है। पंचायत के महुलिया गांव में हर घर नल की स्थिति सबसे चिंताजनक है। सरकार द्वारा लोगों के घरों तक पेयजल आपूर्ति के लिए नल-जल योजना लगाई गई। लेकिन इस योजना की दुर्दशा किसी से छुपी हुई नहीं है। इस योजना को धरातल पर लाने के बजाए सरकार के नुमांइदे राशि का बंदबांट करने में लगे रहे, जिसका परिणाम है कि लोगों को चार साल बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है।

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वार्ड नं. 8 महुंलिया गांव में चार साल पहले पानी टंकी वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति द्वारा लगाई गई थी। काम अपूर्ण रहने के कारण वार्ड सदस्य पर विभाग द्वारा राशि गबन का मामला भी दर्ज कराया गया। जिसमें वार्ड सदस्य व सचिव को जेल की हवा खानी पड़ी बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका। वर्तमान में पीएचईडी को हर घर नल की जिम्मेवारी दी गई। लेकिन यहां भी लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। आम लोग इसे सरकार की विफलता बता रहे है। महादलित टोला कुराव की स्थिति भी ठीक नहीं: महादलित टोला कुराव व रमलबीघा वार्ड नं.05 की स्थिति भी ठीक नहीं है। चार साल पहले टंकी लगाई गई। लेकिन विभागीय उदासिनता की वजह से लोगों को पानी नहीं मिल सका है। कुराव के अलावा वार्ड नं 09 आदिवासी इलाका सतघरवा, वासकुंड एवं वार्ड न.11 मननपुर बस्ती बिंद टोला में पीएचईडी को जिम्मेदारी दी गई। चार साल बाद भी लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने में विभाग हांफ रहा है। यहां के लोगों को कुआं फिर चापाकल के सहारे रहना पड़ रहा है। बसुआचक गांव में जलजमाव से स्कूली बच्चों को होती है परेशानी: भलूई पंचायत के बसुआचक गांव में जल निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहने से स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में रोजना फजिहत का सामना करना पड़ता है। गांव के पानी निकासी को लेकर पक्की नाला का निर्माण कराया गया। लेकिन नाला आधा अधूरा रहने से ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती है। भलूई में हर घर नल जल की स्थिति ठीक: पंचायत मुख्यालय भलूई के वार्ड न.01, 02, 03, 04 एवं मननपुर बस्ती के 12, 13 वार्ड में हर घर नल जल योजना का लाभ हद तक मिल रहा है, बाकी जगहों में स्थिति गंभीर है। 13 वार्ड के इस पंचायत में मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट रंग नहीं ला सका। इस संबंध में विभागीय अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। इसकी दो वजह मानी जा रही है। एक यह कि विभाग के अधीनस्थ कर्मी ही विभाग को गुमराह कर रहे है, दूसरा यह कि शिकायत के बाद भी अब तक वरीय अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बोले जिम्मेदार- हर घर नल जल योजना की समीक्षा समय-समय पर जरूरी है। गर्मी में हर घर नल जल की स्थिति ठीक नहीं थी। विशेष शिविर में हर जगह हर घर नल जल की शिकायत लोगों द्वारा की गई थी। योजना का लाभ आम नागरिकों को मिले इसके लिए जिलाधिकारी स्वंय तत्पर हैं। - प्रिया कुमारी, बीडीओ, चानन प्रखंड। इनकी भी सुनें- विभागीय लापरवाही से योजना का सही लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। आदिवासी इलाके में पानी की किल्लत हमेसा बनी रहती है। हर घर नल जल पीएचईडी द्वारा संचालित किया जा रहा है। पीएचईडी की उदासिनता की वजह से लोगों को शुद्ध पेयजल जल नहीं मिल पा रहा है। - प्रदीप पासवान, मुखिया सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल हर घर नल जल योजना महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। गर्मी में लोगों को निजी चापाकल के सहारे रहना पड़ता है। सरकार के लाखों खर्च के बाद भी लोगों को पानी नसीब नहीं हो पा रहे है। - मसूदन यादव, पूर्व जिप सदस्य। वार्ड न.10 में पीएचईडी द्वारा चार साल पहले बोरिंग कर टंकी लगा दिया गया। लेकिन कायदे से पानी सप्लाई नहीं हो सकी। ड्रील बोरिंग कराने एवं समरसेबल लगवाने में 50 हजार से ज्यादा राशि खर्च होती है, जो साधारण परिवार के लिए संभव नहीं है। - विजय कुमार, मननपुर बस्ती निवासी। पहाड़ी इलाके में योजना पूरी तरह फलॉप साबित हो रही है। इस योजना की वृहत जांच होनी चाहिए। संवदेक व अधिकारी की मिलीभगत से लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। आज भी आदिवासी टोला में बसे लोग गंदे और आयरनयुक्त पानी पी रहे है। - सुधीर यादव, बसुआचक। संवेदक की लापरवाही से लाखों की लागत से हर वार्ड में लगी टंकी महज शोभा की वस्तु बन कर रह गई है। जिम्मेवार अधिकारी को स्थलीय जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। पहाड़ी इलाके में बसे आदिवासी समाज के लोगों को अब भी पईन के पानी पर आश्रित रहना पड़ता है। - नरेश यादव, भलुई। विभागीय अधिकारी द्वारा भौतिक मुआयना नहीं किए जाने से, हर घर नल जल योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में हर घर नल जल योजना शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। - परमानंद शर्मा, बसुआचक। योजना में बरती गई अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी से की जायेगी। हर घर नल जल योजना को दुरूस्त कराने को लेकर पीएचईडी के विभागीय अधिकारी को अल्टीमेंटम दिया गया है। लोगों को शुद्ध पानी मिले इसके लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है। - श्रवण कुमार, युवा जदयू नेता। विभागीय लापरवाही की वजह से हर घर नल जल योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। वर्तमान में हर घर नल जल योजना खुद प्यासा है, ऐसे में घरों तक पानी पहुंचना कतई संभव नहीं है। वर्तमान में तीन हजार से ज्यादा की आबादी निजी चापाकल व कुआं के सहारे प्यास बुझा रही है। - रामदेव मांझी, कुराव। आदिवासी इलाके पर पानी की किल्लत वर्षों से बनी हुई हैं। वर्तमान में वहां पहुंचाना भी मुश्किलल हो गया है। पिछले माह हुई बारिश में सड़क टूट गई है। - शिवनंदन बिंद, उपप्रमुख। महादलित टोला कुराव में हर घर नल जल का लाभ मिल रहा है। यहां के लोगों को अब भी निजी चापाकल के सहारे रहना पड़ रहा है। - पूनम देवी, बसुआचक। भलूई छोड़कर कर पंचायत के अधिकांश वार्डो में हर घर नल जल योजना विभागीय लापरवाही की वजह से पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। ग्रामीणों को कभी पानी मिला ही नहीं। जिस कारण ग्रामीणों को चापाकल पर निर्भर रहना पड़ता है। - नंद कुमार महतो, भलुई।