बोले लखीसराय: वार्ड 17 में नल जल बना मजाक, 37 लाख खर्च, फिर भी 200 से अधिक घर प्यासे

Jan 25, 2026 12:54 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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- जलमिनार पर लगा ताला, पाइप टूटे, मोटर बंद सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में खुला बंदरबांट

बोले लखीसराय: वार्ड 17 में नल जल बना मजाक, 37 लाख खर्च, फिर भी 200 से अधिक घर प्यासे

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल का जल नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 17 में दम तोड़ती नजर आ रही है। वार्ड के कानू टोला में लगभग 37 लाख रुपये की लागत से बनाए गए जलमिनार और बिछाई गई पाइप लाइन के बावजूद 200 से अधिक घरों में महीनों से पानी की आपूर्ति बंद है। इससे स्थानीय लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वार्ड पार्षद शोभा रानी द्वारा इस मामले में दोहरी नीति अपनाई जा रही है। लोगों का कहना है कि वार्ड के कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति हो रही है जबकि कानू टोला को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है।

एक महीने चला पानी, फिर ठप हो गई आपूर्ति: कानू टोला में जल संकट से जूझ रहे लोगों ने बताया कि जलमिनार का निर्माण पूरा होने और टंकी लगाए जाने के बाद पूरे मोहल्ले में पाइपलाइन बिछाई गई थी। योजना के शुरू होने पर करीब एक महीने तक घरों में पानी की आपूर्ति हुईnजिससे लोगों में राहत की उम्मीद जगी थी । इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। पहले पानी का दबाव कम हुआ फिर पाइपलाइन जगह जगह से टूटने लगी और अंततः पूरे मोहल्ले में पानी पूरी तरह बंद हो गया। शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई: पानी बंद होने की शिकायत स्थानीय लोगों ने कई बार वार्ड पार्षद से की लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि न तो टूटे पाइपों की मरम्मत कराई गई और न ही जलमिनार के संचालन की व्यवस्था दुरुस्त की गई।स्थिति और गंभीर तब हो गई जब असामाजिक तत्वों द्वारा जलमिनार में ताला लगा दिया गया जिसके कारण मोटर पूरी तरह बंद पड़ी है। लोगों का सवाल है कि जब जलमिनार में ताला लगा है और मोटर नहीं चल रही तो पानी घरों तक कैसे पहुंचेगा। घटिया पाइपलाइन और रखरखाव पर सवाल : स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि मोहल्ले में बिछाई गई पाइपलाइन की गुणवत्ता बेहद खराब है। कई जगह पाइप टूट चुके हैं जिससे पानी की आपूर्ति बाधित हुई।लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी कम अवधि में पाइपलाइन खराब नहीं होती।इससे संवेदक और नगर परिषद के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने योजना में खर्च की गई राशि की जांच की मांग की है।जल संकट का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाओं को दूर दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है।कानू टोला के लोगों ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद के कुछ पदाधिकारी और संवेदक की मनमानी के कारण मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट की यह स्थिति हुई है। लोगों का कहना है कि 37 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ जमीन पर नहीं दिख रहा हैं जो गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है। जांच और जल्द समाधान की मांग: स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि जलमिनार से ताला हटाकर मोटर चालू कराई जाए,टूटे पाइपों की मरम्मत या उन्हें बदला जाए पूरी योजना की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। - प्रस्तुति: मनोज कुमार।

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