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26 अक्तूबर, 2020|1:43|IST

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पचना रोड में वाहन आपको खुद चलाएगा!

पचना रोड में वाहन आपको खुद चलाएगा!

लखीसराय शहर का पचना रोड। यहां बरसात के दिनों में यदि आपने वाहनों का प्रवेश कराया, तो आपको या फिर आपके साथ मौजूद लोगों को वाहन से उतरकर धक्का लगाने की नौबत आ जाएगी। वाहनों के साथ ही आपके शरीर के भी पार्ट-पुरजे ढीले पर जाएंगे। कहने को यह लखीसराय से शेखपुरा के लिए शार्टकट रास्ता है, लेकिन जब आपके समय ही यहां की उबड़-खाबड़ सड़कें बर्बाद कर दें, तो फिर ऐसे शॉर्टकट रास्तों पर चलना हीं क्यों? दरअसल, लखीसराय का पचना रोड खासकर बारिश के दिनों में भयावह हो जाता है। यहां की जर्जर सड़कों को लेकर लंबे समय से लोगों की मांग उठती रही है, लेकिन सुनने वाला तो भी कोइ हो! लखीसराय में ग्रामीण गतिविधियों की लाइफ लाइन पचना रोड, पतनेर सहित जोकमैला, भेनौरा, डिहरा, झाखड़, जनकपुर, चरोखरा, खीरहो, मोरमा, करौता, पचौता, विक्कम, तिलोखर, दोगाय, कछियाना, किशनपुर, कालभैरो, गंगटा, दीगहा आदि कई गांवों को जोड़ते हुए शेखपुरा जिला में एनएच 18 से सीधे जुड़ जाती है। अगर यह पचना रोड थोड़ा भी काम चलाऊ रहे तो लखीसराय से शेखपुरा का यह बेहतरीन शॉर्टकट वाला रास्ता है, जो कि लगभग 15 किलोमीटर दूरी को कम करता है। पुराने जमाने में यह सड़क मुंगेर से राजगीर जाने का मुख्य मार्ग हुआ करता था, लेकिन राजनीतिक उदासीनता की वजह से आज यह पथ कोमा में है। लखीसराय से लगभग 20 गांव इस सड़क के माध्यम से जुड़े हुए हैं।

रोड नहीं तो वोट नहीं

सड़क की खस्ता हालत की वजह से उपजा जन आक्रोश अब जन आंदोलन का रूप ले रहा है। विगत 28 जून को सभी गांव के लोगों की एक बैठक में निर्णय लिया गया कि अब यह सड़क का अधिग्रहण यदि पीडब्ल्यूडी में नहीं किया गया तो सभी 20 गांव के लाखों लोग एक साथ वोट बहिस्कार कर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे। लोगों ने कहा कि हर बार वे लोग मांग करते रहे हैं, लेकिन कोई भी प्रशासनिक पदाधिकारी या फिर जनप्रतिनिधि सुनने को तैयार नहीं है।

सांसद ने मांगा था चार माह का समय

बीते लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया की वजह से मुख्य ग्राम पत्नेर के नाराज लोगों को वर्तमान क्षेत्रीय सांसद ने समझाते हुए चार माह का समय मांगा था। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा। इसके बाद लोगों ने लोकसभा चुनाव में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था, लेकिन वे बातें भी हवा-हवाई साबित हुई।

10 किलोमीट सड़क, लगते हैं डेढ़ घंटे

मोरमा-तिलोखर गांव तक की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय होती है। सड़क पर वाहनों के प्रवेश होते ही फजीहत शुरू हो जाती है। कादो-कीचड़ में लोगों के कपड़े भी गंदे होते हैं और वाहनों का परिचालन भी सही से नहीं हो पाता है। इधर आंदोलन की घोषणा करते हुए 7 जुलाई को 13 किलोमीटर का पैदल मार्च करने की योजना बनाई गई है।

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  • Web Title:Vehicle will drive you on Pachana Road