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सेवादल प्रशिक्षण शिविर में आत्ममंथन का संदेश

सेवादल प्रशिक्षण शिविर में आत्ममंथन का संदेश

संक्षेप:

लखीसराय के टाउन हॉल में आत्ममंथन विषय पर सेवादल प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। महात्मा दिलीप जी ने आत्मज्ञान और सत्गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुशासन और सेवा भाव पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में सभी ने सेवा और आत्ममंथन के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

Jan 11, 2026 12:47 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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लखीसराय, एक प्रतिनिधि। शनिवार को टाउन हॉल लखीसराय के प्रांगण में आत्ममंथन विषय पर आधारित सेवादल प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम क्षेत्र-कटिहार के सेवादल प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा था, जिसमें बड़ी संख्या में महात्मा, बहनें एवं सेवादल के सदस्य शामिल हुए। सत्संग के मुख्य वक्ता महात्मा दिलीप जी रहे, जिन्होंने अपने प्रवचन के माध्यम से आत्मज्ञान का बोध कराया और जीवन में सत्गुरु के महत्व को विस्तार से समझाया। महात्मा दिलीप जी ने कहा कि आत्ममंथन का एक ही सार हैसत्गुरु ही आदर्श हैं और सत्गुरु ही आचार। यदि व्यक्ति अपने जीवन में सत्गुरु के बताए मार्ग पर चले, तो समाज में प्रेम, सेवा और सद्भाव अपने आप स्थापित हो जाता है।

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उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि सत्संग या सेवा के दौरान किसी प्रकार की चोरी जैसी घटना भी हो जाए, तो सच्चे महात्मा बिना किसी को अपमानित किए, प्रेम और विवेक के साथ दूसरे का सामान वापस दिलाने का गुण रखते हैं। यही सत्संग और आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक आचरण है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सत्संग में अनुशासन, मर्यादा और सेवा भाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। इसमें बताया गया कि सत्संग में कैसे बैठना चाहिए, कैसे आचरण करना चाहिए, सेवा के कार्यों को किस प्रकार निष्ठा और विनम्रता के साथ करना चाहिए तथा आपसी सम्मान और सहयोग कैसे बनाए रखना चाहिए। महात्मा दिलीप जी ने कहा कि सेवादल का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि सत्गुरु के विचारों को व्यवहार में उतारना है। इस सत्संग प्रशिक्षण सत्र में अमरजीत प्रजापति, सुमित कुमार, मनीष कुमार, रीना बहन, रेखा बहन, संजय कुमार सहित सभी सेवादल के महात्मा एवं बहन जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक, अनुशासित और प्रेरणादायक रहा। अंत में सभी ने सत्गुरु के प्रति निष्ठा रखते हुए सेवा, सदाचार और आत्ममंथन के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।