Rare Astronomical Conjunction During Pitru Paksha Lunar and Solar Eclipses 122 साल बाद पितृपक्ष में बन रहा दुर्लभ संयोग, Lakhisarai Hindi News - Hindustan
Hindi NewsBihar NewsLakhisarai NewsRare Astronomical Conjunction During Pitru Paksha Lunar and Solar Eclipses

122 साल बाद पितृपक्ष में बन रहा दुर्लभ संयोग

- पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के साथ और समापन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण के साथ होगा

Newswrap हिन्दुस्तान, लखीसरायThu, 4 Sep 2025 04:16 AM
share Share
Follow Us on
122 साल बाद पितृपक्ष में बन रहा दुर्लभ संयोग

कजरा, एक संवाददाता। पितृपक्ष हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या तक 16 दिनों तक चलता हैं। इन दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए मनाया जाने वाला पितृपक्ष इस बार विशेष होने वाला है। क्योंकि इस बार एक दुर्लभ खगोलीय संयोग इसके साथ जुड़ा है। 7 सितंबर से प्रारंभ होने वाले पितृपक्ष की शुरुआत इस बार चंद्रग्रहण के साथ होगी तो समापन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण के साथ होगा। हालांकि सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा।

माना जा रहा है कि ऐसा दुर्लभ संयोग 122 साल बाद आया है। ज्योतिषाचार्य आचार्य अशोक पांडेय ने बताया कि पितृपक्ष हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या तक 16 दिनों तक चलते हैं। इन दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इन दिनों में लोग अपने पितरों का प्रतिदिन तर्पण करते हैं, लेकिन इस बार बेहद दुलर्भ संयोग पितृपक्ष में पड़ने जा रहा है। जो सालों में कभी कभार ही देखने को मिलता है। इस पितृपक्ष दो महत्वपूर्ण ग्रहण घटित होंगे। पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के साथ और समापन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण के साथ होगा। माना जा रहा है कि ऐसा संयोग 122 सालों बाद बन रहा है, जो कि बेहद दुर्लभ है। पितृपक्ष की शुरुआत और समाप्ति दोनों ही ग्रहण के साथ होगी। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में इस तरह दो बड़े ग्रहणों का एक साथ आना अत्यंत दुर्लभ योग माना जाता है, जो वर्षों में शायद ही कभी होता है। सात सितंबर को चंद्र ग्रहण का आरंभ रात 9.58 बजे और समापन 1.26 बजे होगा। यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र तथा कुंभ राशि पर होगा। आचार्य श्री पांडेय ने आगे बताया कि शास्त्रों में कहा गया है कि चंद्रग्रहण में ग्रहण से पूर्व नौ घंटे और सूर्यग्रहण में 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। इसलिए इस बार चंद्रग्रहण का सूतक 7 सितंबर को 12:57 पर प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल में बाल, वृद्ध, रोगी को छोड़ कर अन्य के लिए खानपान वर्जित बताया गया है। ग्रहण काल में शास्त्रीय वचन अनुसार भोजन निवृत्ति के साथ धार्मिक कृत्य श्राद्ध, दान आदि करना चाहिए। आचार्य श्री पांडेय का मानना है कि इस खगोलीय संयोग का प्रभाव सभी लोगों के जीवन पर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ेगा। अलग-अलग राशियों के लिए इसका असर अलग होगा, कहीं यह परिवर्तन लाएगा, तो कहीं चेतावनी। ऐसे में यह समय अध्यात्म, संयम और पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त रहेगा।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।