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रामकथा मानव कल्याण का जहां मार्ग प्रशस्त करता, वहीं मुक्ति का रास्ता भी बताता

रामकथा मानव कल्याण का जहां मार्ग प्रशस्त करता, वहीं मुक्ति का रास्ता भी बताता

बड़हिया नगर क्षेत्र अंतर्गत राजारानी मंदिर में चल रहे सातदिवसीय रामकथा महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास अयोध्या के संत श्री श्री 1008 श्री रामनंदन दास जी महाराज ने रामकथा व रामचरित्र मानस पर विस्तार से प्रवचन किया। उन्होंने कहा रामकथा मानव कल्याण का जहां मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं यह मुक्ति का रास्ता भी बताता है। इसके रसपान ने बुद्धि व विचार बदलते है जिससे आपसी कटुता समाप्त होती है और समरसता फैलती है।

कथा व्यास ने कहा कि मानव का कल्याण उसकी मानवता पर ही निर्भर होता है। पर मानवता क्या है ,समाज आज इससे भटक रहा है। उसे याद कराने का सफल माध्यम राम कथा ही है। इसके श्रवण मात्र से लोगों को मानवता का ज्ञान हो जाता है। सतसंग भी इसका एक सफल माध्यम है। रत्नाकर जैसे दुराचारी व्यक्ति को सत्संग से ही अच्छा इंसान बनने का अवसर प्राप्त हो सका। जब भी मानव सत्संग का सहारा लिया उसमें अच्छे विचार, अच्छी सोच का समावेश होने लगा। श्रीरामचरित् मानस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह धार्मिक ग्रंथ के साथ —साथ एक सामाजिक ग्रंथ भी है । इसका उद्देश्य समरसता को कायम करना ही है। भगवान श्रीराम एक ऐसे समाज की स्थापना करना चाहते थे कि जिससे आपस में ऊंच—नीच और भेदभाव को खत्म किया जा सके। इस मौके पर विपिन सिंह, सूर्य नारायण सिंह, गणेश सिंह ,पंकज कुमार, गंगोत्री सिंह ,सुरेश सिंह ,बच्चा प्रसाद सिंह, अवधेश सिंह, शशिधर सिंह ,अर्जुन सिंह ,बलराम सिंह ,राम सागर सिंह पाठक जी ,रजनीकांत सिंह ,विजय सिंह, बसंत सिंह ,गोपाल सिंह,सुरेश प्रसाद सिंह सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।

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  • Web Title:Ramcharitra Manas tells in detail