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प्रभात ने अभावों की जमीन पर उगाई सफलता की फसल

प्रभात ने अभावों की जमीन पर उगाई सफलता की फसल

कभी भाग्य, कभी गरीबी, कभी अवसर और कभी हालिया परिस्थिति को लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते का रोड़ा बताया जाता रहा है, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति वाले किसान परिवार में पैदा होकर, पैसे की कमी के बीच भी अपनी पढ़ाई पूरी करते हुए कैसे अभावों की बंजर जमीन पर सफलता की फसल उगाई जा सकती है, इसकी नजीर पेश की है लखीसराय के पतनेर निवासी प्रभात ने। पतनेर के किसान सुरेंद्र प्रसाद सिंह के छोटे बेटे प्रभात कुमार ने जॉब में रहते हुए अपने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की। वह उत्तर प्रदेश के रेणुकूट में बिजली बोर्ड में इंजीनियर हैं। इस साल कुल 1009 सफल अभ्यर्थिंयों में उनका रैंक 1000 है, जिससे वह पूर्ण संतुष्ट नहीं हैं और अगले प्रयास में बेहतर रैंक लाने की कोशिश करेंगे। उनकी सफलता पर मां-पिता के अलावे पतनेर गांव के लोग भी खुश हैं कि यूपीएससी कंपीट करनेवाले प्रभात गांव से पहले व्यक्ति हैं। माता-पिता के साथ यूपी के रेणुकूट में रह रहे प्रभात से हिन्दुस्तान ने खास बातचीत की। आपकी शुरुआती पढ़ाई कहां से हुई, यूपी कैसे पहुंचे? एक कान्वेंट में स्कूली पढ़ाई के बाद हसनपुर हाई स्कूल से मैट्रिक किया और फिर पिताजी ने पैसे जुटाकर पटना भेज दिया, जहां बीएन कॉलेज से आईएससी करते हुए इंजीनियरिंग इंट्रेंस दिया। संयोग से एनआईटी, पटना में प्रवेश मिला और फिर वहां बी.टेक किया। वहीं से यूपी बिजली बोर्ड की नौकरी लग गई। यूपीएससी ही क्यों चुना और तैयारी कब से शुरू की? लोक सेवा की सामाजिक प्रतिष्ठा और ग्रास रूट लेवल पर समाज के लिए कार्य करने के अवसर ने आकर्षित किया। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मैंने पढ़ाई पूरी करते ही पहले जॉब किया और फिर 2013 से ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जॉब करते हुए शुरू कर दी। इंजीनियर हैं तो भारतीय इंजीनियर सेवा में क्यों नहीं कोशिश की? आईईएस के लिए कभी प्रयास नहीं किया। मेरा गोल आईएएस ही रहा। तीन बार में दो बार इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। मार्गदर्शकों से हिम्मत मिलते रहने के कारण हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में सफल हुआ। 1000वां रैंक संतोष नहीं दे रहा, अगली बार फिर प्रयास कर बेहतर करुंगा। आपकी सफलता के पीछे कौन-कौन लोग हैं? मेरे माता-पिता, अंकल डॉ अशोक कुमार सिंह का और मेरे भाई अंकेश, जोकि एनआईटी, कालीकट से पासआउट होकर, ओरेकल, बैंगलोर में इंजीनियर हैं, इन सबको श्रेय जाता है। आईपीएस अधिकारी मनीष कुमार वर्मा से काफी प्रेरणा मिली। वह मेरे क्लासमेट रहे हैं और सिक्किम कैडर में हैं। इंटर के खराब रिजल्ट से हताश छात्रों को क्या संदेश देंगे? रिजल्ट या खराब प्रदर्शन से परीक्षार्थी हताश न हों। मेरे लिए भी लक्ष्य मुश्किल था। जॉब के दौरान बचे हुए समय में ही तैयारी किया करता था। तीन बार नापास हुआ, लेकिन हार नहीं मानी। इंटर परीक्षार्थियों के पास पूरक परीक्षा जैसे विकल्प हैं, तैयारी कर फिर से आगे बढ़ें।

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  • Web Title:Prabhat crop grown success on the ground of defects