मनरेगा का नाम बदलने पर सियासत तेज
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने पर राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि सरकार गांधी की विरासत को मिटाने की कोशिश कर रही है। मनरेगा गरीबों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। भाजपा ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए 125 दिनों का रोजगार देने का दावा किया।

कजरा,एक संवाददाता। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने की चर्चाओं को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार मनरेगा का नाम बदलकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने की कोशिश कर रही है। कजरा में राहुल- प्रियंका सेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमर सिंह ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों, गरीबों को काम, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। ऐसे में योजना के नाम से ‘गांधी’ हटाना देश के इतिहास और संविधान की भावना के खिलाफ है।
भाजपा लगातार गांधी, नेहरू और आज़ादी के आंदोलन से जुड़े प्रतीकों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। श्री सिंह ने आगे कहा कि मनरेगा के जरिए ग्रामीण गरीबों को हर साल 100 दिन का रोजगार मिलता है और इससे लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। योजना का नाम बदलना जनता का ध्यान मूल मुद्दों-बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण संकट-से भटकाने की कोशिश है। वहीं कजरा भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार गरीबों को 100 दिनों के बदले 125 दिनों का रोजगार मुहैया करा रही है। सरकार का फोकस योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है, न कि नाम पर। फिलहाल मनरेगा के नाम को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। मौके पर युवा कांग्रेस नेता राजीव सिंह भी मौजूद थे।

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