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23 सितम्बर, 2020|7:05|IST

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ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे जिले के लोग

ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे जिले के लोग

कोरोना वायरस के कारण संदिग्ध मरीजों के साथ जेनरल मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कोरोन संक्रमण फैलने के डर से जिले के लगभग सभी प्राइवेट नर्सिंग होम व निजी क्लिनिकों में मरीज का इलाज पूरी तरह बंद है। सरकार के निर्देशानुसार एक सप्ताह से सदर अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए जनरल ओपीडी शुरू है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कोसो पैदल चलकर आने वाले मरीजों को सदर अस्पताल से बिना इलाज ही निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है। जिसके कारण मरीज को स्थानीय व ग्रामीण चिकित्सक से ही सभी मर्ज का इलाज कराना पड़ रहा है। जिले के लगभग 12 लाख की आबादी कोरोना संक्रमण के कारण स्थानीय व ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे ही अपना इलाज करने को बेबस देखे जा रहे हैं। जिले के अधिकतर मरीज बिना पुजा के ही मेडिकल स्टोर से अपनी मर्ज बता कर दवा ले रहे हैं। बिना चिकि त्सक के दवा का सेवन करना मरीज के लिए फायदे के बदले नुकसानदेय भी हो सकता है।

चिकित्सकों की माने तो मरीज को किसी भी मर्ज का दवा बिना चिकित्सीय सलाह का नहीं लेना चाहिए। खास कर कोरोना संक्रमण के इस महामारी के दौर में तो लोगों को और सावधानी बरते की आवश्यकता है। वहीं जिले वासियों की माने तो सबकुछ ठीक है मगर जब चिकित्सक अपनी क्लिनिक खोल ही नहीं रहे हैं तो हमलोग क्या करें। मजबूरन हमलोगों को स्थानीय व ग्रामीण चिकित्सक से हर मर्ज का इलाज कराना पड़ रहा है। पेट में दर्द का इलाज के लिए गुरुवार को लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर सदर अस्पताल पहुंचे चानन प्रखंड के लाखोचक निवासी रवि कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मी द्वारा घंटो इंतजार करवाया गया । उसके बाद बोलो गया कि अभी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज होता है, इसलिए स्थानीय चिकित्सक से या फिर मेडिकल स्टोर दवा खरीद ले। यहां इलाज कराने पर कोरोना से आप भी संक्रमित हो सकते हैं। आसपास क्षेत्रों से विभिन्न बीमारी का इलाज कराने आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य कर्मी द्वारा रोजाना इसी तरह का बहाना बनाकर बिना इलाज आपस घर भेज दिया जाता है।

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  • Web Title:People of the district rely on rural doctors