
इलाज शुरू नहीं, विभागीय उदासीनता के शिकार बच्चे
लखीसराय के सदर अस्पताल में पीकू वार्ड का उद्घाटन 10 महीने पहले हुआ था, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह अभी भी बंद है। गंभीर रूप से बीमार 17 वर्ष तक के बच्चों के लिए इलाज की सुविधा नहीं मिलने से परिजनों को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लखीसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। सदर अस्पताल में 0 से 28 दिन उम्र तक के बीमार नवजात शिशु के बेहतर इलाज के लिए एसएनसीयू यूनिट का स्थापना के बाद एक माह से 17 वर्ष तक उम्र के बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगभग तीन वर्ष की मशक्कत के बाद सदर अस्पताल में ही पीकू वार्ड का निर्माण किया गया। लगभग दो करोड़ 39 लाख की लागत से तैयार पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानि पीकू वार्ड का उद्घाटन पूरे ताम-झाम के साथ लगभग 10 महीना पूर्व छह फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिले में लगभग 400 करोड़ से अधिक की लागत से विभिन्न योजना के शिलान्यास व उद्घाटन के साथ किया था।

हालांकि विभागीय उदासीनता के कारण जिले के पीड़ित मरीज को इसका लाभ 10 महीना बाद भी मिलना सुनिश्चित नहीं हो पाया है। गंभीर रूप से बीमार 17 वर्ष तक के बच्चों का होना है इलाज: पीकू वार्ड में एक माह से 17 वर्ष उम्र तक के गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलनी थी, लेकिन इसके नहीं खुलने के कारण अभी भी शहर के निजी अस्पताल या निशुल्क इलाज के लिए जिले से बाहर हायर सरकारी संस्थान का रुख गंभीर रूप से बीमार बच्चों के परिजन को करना पड़ रहा है। जिसके कारण परिजन को मानसिक के साथ आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। छह बेड का आईसीयू सहित कुल 39 बेड का पूर्ण रूप से वातानुकूलित तैयार पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट पीकू वार्ड संचालन के लिए अभी तक राज्य स्वास्थ्य समिति पटना से जिला स्वास्थ्य विभाग को ना तो कोई गाइडलाइन ना ही चिकित्सक सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी की टीम उपलब्ध कराया गया है। विशेषज्ञ चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी की अनुपलब्धता के कारण वार्ड में अभी भी ताला लटक रहा है। गंभीर रोग से पीड़ित बच्चों के लिए पीकू वार्ड बहुत उपयोगी: सदर अस्पताल के डीएस सह वरिष्ठ शिशु रोग के विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि गंभीर रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज में पीकू वार्ड की अहम भूमिका होती है। वर्तमान में ठंड के कारण राज्य स्वास्थ्य समिति पटना से पूरे राज्य के साथ स्थानीय जिले में अलर्ट जारी है। इस दौरान अगर पीकू वार्ड संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति से गाइडलाइन के साथ चिकित्सक उपलब्ध हो जाता तो काफी हद तक शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्र के कुल 13 से 14 लाख की आबादी के बीच 0 से 17 वर्ष उम्र के बच्चों को राहत मिलती। उन्होंने बताया कि पीकू वार्ड में एक माह से 17 वर्ष तक उम्र के बच्चों के बेहतर इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक सहित एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक मशीन व दवा की उपलब्धता होती है। जिसका उपयोग प्रशिक्षित चिकित्सक के द्वारा ही संभव होता है। सदर अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार एक माह से 17 वर्ष उम्र तक के बच्चों का लगभग प्रतिदिन सदर अस्पताल में इलाज के लिए आना होता है। जिन्हें जेनरल ओपीडी की सुविधा उपलब्ध कराया जाता है। गंभीर स्थिति में पीकू वार्ड संचालन के अभाव में हायर संस्थान रेफर करना पड़ता है। इधर डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि पीकू वार्ड संचालन की ओर राज्य स्वास्थ्य समिति का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सीएस के माध्यम से पत्र लिखा जाएगा। ज्ञात हो नियमित अंतराल पर पीकू वार्ड संचालन नहीं होने से संबंधित खबर को हिन्दुस्तान अखबार प्रमुखता से प्रकाशित भी करता रहा है। खबर छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासनिक पदाधिकारी के द्वारा वार्ड संचालक को लेकर पहल शुरू किया जाता है। हालांकि कुछ दिन बाद मामला ठंडा बस्ता में शामिल कर दिया जाता है। जिसका खामियाजा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर पीड़ित परिजन को भुगतना पड़ रहा है।

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