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उवि बड़हिया में ऐतिहासिक कार्यक्रम, जिलाधिकारी ने छात्रों को दिए सफलता के मंत्र

उवि बड़हिया में ऐतिहासिक कार्यक्रम, जिलाधिकारी ने छात्रों को दिए सफलता के मंत्र

संक्षेप:

बड़हिया में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने छात्रों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया और सफलता के लिए महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग, अनुशासन और सेल्फ स्टडी पर जोर दिया। विद्यालय का इतिहास और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया।

Nov 12, 2025 01:25 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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बड़हिया, निज प्रतिनिधि । देश के प्रथम शिक्षा मंत्री डॉ मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर मंगलवार को नगर स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय, बड़हिया में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम मिथिलेश मिश्र, डीईओ यदुवंश राम, प्राचार्या डॉ किरण कुमारी, पूर्व प्राचार्य विपिन कुमार व अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं अबुल कलाम आजाद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, वहीं अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं शताब्दी साहित्य की प्रति देकर किया गया। शिक्षक पीयूष कुमार झा के संचालन में इस अवसर पर विद्यालय के 165 मैट्रिक परीक्षार्थियों को जिलाधिकारी ने अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया और सफलता के टिप्स दिए।

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डीएम ने कहा कि समय सबसे मूल्यवान पूंजी है, जो इसका सदुपयोग करता है वही सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सेल्फ स्टडी, एकाग्रता और अनुशासन को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि अभ्यास किसी भी डर को समाप्त करता है। उन्होंने दशरथ मांझी की मिसाल देते हुए कहा कि दृढ़ निश्चय से असंभव भी संभव किया जा सकता है। डीएम ने छात्रों को डायरी लेखन की आदत डालने, मोबाइल-टीवी से दूरी बनाकर नियमित अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि 23 दिसंबर को विद्यालय दिवस एवं किसान दिवस संयुक्त रूप से मनाया जाए, क्योंकि यह दिन विद्यालय की ऐतिहासिक स्वीकृति से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि सभी उच्च विद्यालयों में मैट्रिक के शीर्ष तीन छात्रों के नाम व प्रतिशत प्रदर्शित किए जाएं ताकि अन्य विद्यार्थियों को प्रेरणा मिले। विद्यालय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए शिक्षक पीयूष कुमार झा ने बताया कि इसकी स्थापना 1912 में डॉ श्याम कुंज चटर्जी ने की थी। 1927 में पहली बार यहां के विद्यार्थी पटना विश्वविद्यालय के अंतर्गत मैट्रिक परीक्षा में सम्मिलित हुए थे। विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ संगीत, विज्ञान और नृत्य में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक फोटोग्राफी सत्र आयोजित हुआ। विद्यालय परिवार, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राओं की बड़ी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।