डंपिंग यार्ड के अभाव में कचरे में तब्दील हो रहा जिला, शहर बना अघोषित कूड़ाघर
कचरे से निजात कब: डंपिंग यार्ड के अभाव में कचरे में तब्दील हो रहा जिला, शहर बना अघोषित कूड़ाघर

लखीसराय, कार्यालय संवाददाता। जिले में स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत सवालों के घेरे में है। लखीसराय नगर परिषद के साथ-साथ सूर्यगढ़ा और बड़हिया नगर परिषद क्षेत्र में अबतक न तो स्थायी कचरा डंपिंग यार्ड का निर्माण हो सका है और न ही वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए कोई केंद्र स्थापित किया जा सका है। नतीजा यह है कि शहर के लगभग सभी वार्डों में जहां-तहां कचरा डंप कर अघोषित डंपिंग यार्ड बना दिए गए हैं। पूरा शहर कचरे के अंबार में तब्दील होता जा रहा है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लखीसराय नगर परिषद क्षेत्र में विद्यापीठ चौक, किऊल नदी के तट, रिहायशी इलाकों के पास खाली पड़ी जमीन, सड़क किनारे और गलियों में खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है।
स्थिति यह है कि कई जगहों पर कचरे का ढेर स्थायी रूप ले चुका है। नगर परिषद डंपिंग यार्ड नहीं होने का हवाला देकर शहर का कचरा जहां जगह मिलती है वहीं डाल दे रही है। इससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ---------- अधिकतर वार्डों में खुले स्थान पर मिलेगा कचरा: शहर के अधिकतर वार्डों में खुले स्थानों पर कचरा जमा होने से लोगों का जीना दूभर हो गया है। वार्ड संख्या 25 की स्थिति भी अन्य वार्डों से अलग नहीं है। यहां भी जहां खाली जमीन मिली, वहीं कचरा डंप कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे से उठने वाली दुर्गंध के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मच्छर, मक्खी और आवारा पशुओं की संख्या बढ़ गई है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद ने कई खाली स्थानों को अघोषित डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया है। न तो नियमित रूप से कचरा हटाया जाता है और न ही किसी प्रकार का छिड़काव या सफाई की व्यवस्था की जाती है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब कचरे का गंदा पानी सड़कों और घरों तक फैल जाता है। --------- 18 जनवरी से चल रहा अभियान तब हरकत में आया प्रशासन: इधर, 18 जनवरी से लगातार हिन्दुस्तान अखबार में कचरे की समस्या को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। डीएम मिथिलेश मिश्र ने अंचलाधिकारी को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द जमीन चिह्नित कर डंपिंग यार्ड और कचरा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया जाए। प्रशासनिक स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि बिना स्थायी व्यवस्था के शहर को स्वच्छ रखना संभव नहीं है। इस आलोक में एक प्राइवेट जमीन को कचरा निस्तारण केंद्र के लिए चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, डंपिंग यार्ड के लिए अब भी उपयुक्त जमीन की तलाश जारी है। प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी जगह का चयन किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। फिलहाल, जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक शहरवासियों को कचरे के बीच ही जीवन गुजारना पड़ रहा है। लोगों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्थायी व्यवस्था के तौर पर कचरे को नियमित रूप से उठाया जाए और अघोषित डंपिंग यार्ड को तुरंत हटाया जाए। आमजन का कहना है कि स्वच्छता केवल कागजों और अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी उसका असर दिखना चाहिए, ताकि शहर को कचरे के इस संकट से निजात मिल सके।

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