शहर के फुटपाथों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा, जाम से कराह रहा शहर
- प्रशासन का अतिक्रमण हटाओ अभियान विफल, सड़कों पर ठेला-खोमचा और सब्जी दुकानों की भरमारनगर परिषद के फुटपाथों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा, जाम से कराह र

लखीसराय, हिन्दुस्तन संवाददाता। पिछले दिनों जाम से निजात दिलाने के लिए डीएम मिथिलेश मिश्र ने शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए एक टीम तैयार की थी। उक्त टीम ने कुछ दिनों तक अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चलाया और सड़कें चौड़ी भी हुई, लेकिन एक बार फिर से शहर जाम से जूझने लगा है। अतिक्रमण हटाओ अभियान को गति नहीं मिल पा रही है। टीम में एडीएम के नेतृत्व में कई पदाधिकारी और पुलिसकर्मी कों शामिल किया था जिससे अतिक्रमण को हटाने की कर्रवाई की गई थी। डीएम के इस अभियान का शहर के अतिक्रमणकारियों पर थोड़ा असर पड़ा लेकिन पदाधिकारियों के सुस्त रवैया के कारण अतिक्रमणकारी फिर से अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है।
नगर परिषद के द्वारा आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाए गए फुटपाथ आज अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है। पैदल चलने के लिए निर्मित फुटपाथों पर ठेला, खोमचा, सब्जी दुकान, फल विक्रेता और अस्थायी दुकानों ने डेरा जमा लिया है। नतीजतन पैदल यात्रियों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ता है और यही स्थिति शहर में दिन प्रतिदिन बढ़ते जाम का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। शहर के नया बाजार स्थित शहीद द्वार, पचना रोड चौक, बड़ी दुर्गा स्थान, समाहरणालय के समीप तथा पुरानी बाजार, कवैया रोड सहित अन्य व्यस्त व्यापारिक इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। सुबह हो या शाम इन इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती है। एंबुलेंस, स्कूल वाहन, दोपहिया और चारपहिया सभी जाम में फंसकर रह जाते हैं। नगर परिषद द्वारा लाखों रुपये की लागत से फुटपाथों का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता मिले और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। लेकिन आज वही फुटपाथ दुकानदारों और ठेला संचालकों की रोज़ी रोटी का अड्डा बन गया है। फुटपाथ पर कहीं लकड़ी की गुमटी, कहीं टिन की दुकान, कहीं प्लास्टिक शीट डालकर अस्थायी ढांचा खड़ा कर दिया गया है। कई जगहों पर दुकानदारों ने फुटपाथ के साथ साथ सड़क के हिस्से पर भी कब्जा कर लिया है। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई है और वाहन चालकों को निकलने में भारी परेशानी हो रही है। -------- सड़क पर ही सज जाती है दुकानें: सब्जी, फल, मछली और मांस की दुकानें सड़क के किनारे ही नहीं बल्कि कई जगह सड़क के बीच तक फैल जाती हैं। दुकानदार अपना सामान सड़क पर फैला देते हैं और ग्राहक वहीं खड़े होकर खरीदारी करते हैं। इससे सड़क पर लगातार रुक रुक कर वाहन चलते हैं और थोड़ी देर में जाम की स्थिति बन जाती है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को होती है। पैदल चलने की जगह न होने के कारण उन्हें तेज़ रफ्तार वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता है जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है।अतिक्रमण हटाओ अभियान अधिक समय तक प्रभावी साबित नहीं हो सका। जैसे ही प्रशासनिक अमला वहां से हटा, अतिक्रमणकारी फिर से उसी स्थान पर लौट आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे अभियान केवल दिखावे तक ही सीमित रहेंगे। ------- नगर परिषद की लापरवाही उजागर: अतिक्रमण की समस्या के लिए नगर परिषद की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर परिषद पर आरोप है कि वह जानबूझकर आंख मूंदे बैठी है। कई दुकानदार वर्षों से फुटपाथ पर दुकान लगाकर बैठे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अगर नगर परिषद नियमित रूप से निगरानी करे और अवैध कब्जा हटाने के बाद वहां स्थायी अवरोध या बैरिकेडिंग कर दे तो अतिक्रमण दोबारा नहीं हो सकेगा। अतिक्रमण के कारण लगने वाले जाम ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। नौकरीपेशा लोग समय पर दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी हो रही है। फिलहाल स्थिति यह है कि अतिक्रमण, जाम और अव्यवस्था शहर की पहचान बनती जा रही है। डीएम का अभियान अगर नियमित और सख्त नहीं हुआ तो यह समस्या और गंभीर होती जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और नगर परिषद मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।

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