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21 सितम्बर, 2020|11:58|IST

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लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

1 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

2 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

3 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

4 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

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5 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

लखीसराय में खरना आज व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य कल

6 / 6सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन...

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सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ गुरुवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। भगवान सूर्य देव की आराधना में जिला मुख्यालय सहित पूरा जिला डूब गया है। चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को छठ व्रती खरना करेंगे। शनिवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाएगा, तो वहीं रविवार को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पर्व संपन्न हो जाएगा।

गुरुवार को नहाय खाय पर छठ व्रतियों ने शुद्धता एवं सात्विकता के साथ कोई गंगा नदी में तो किसी ने घर में ही स्नान किया। इसके बाद चावल, दाल व कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में बनाया। अपने परिजनों ,दोस्तों व मुहल्ले वालों के साथ प्रसाद ग्रहण किया। पौराणिक मान्यता है कि आज के प्रसाद का काफी महत्व रहता है। छठ पर्व का यह पहला प्रसाद होता है। लोगों ने बड़े ही श्रद्धा भाव से प्रसाद को ग्रहण किया। छठ पर्व करने वाले घरों में इस अवसर पर साफ सफाई को काफी महत्व दिया गया। नियम निष्ठापूर्वक छठ व्रतियो ने नहाय खाय का पर्व किया।

ऐसी मान्यता है कि अरवा चावल, चने की दाल एवं कद्दू के सेवन से तेजस्विता, निरोगता एवं बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। वहीं खरना के प्रसाद व सूर्य की उपासना से आंखों में रोशनी, निरोगता, बुद्धिमता के साथ रक्तहीनता, चर्मरोग, यक्ष्मा से बचाव, पापों का नाश, संपत्ति एवं रत्न की प्राप्ति एवं मान-सम्मान और यश में वृद्धि होती है।

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  • Web Title:Kharna in Lakhisarai and Arghya to sunrise