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असर: डीएम ने दिव्यांगों को 24 घंटे में सुविधा बहाल करने का दिया निर्देश

असर: डीएम ने दिव्यांगों को 24 घंटे में सुविधा बहाल करने का दिया निर्देश

संक्षेप:

हिन्दुस्तान में प्रकाशित बोले का असर:अखबार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं को आवाज मिली है

Jan 03, 2026 01:01 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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लखीसराय, हिन्दुस्तान संवाददाता । हिन्दुस्तान अखबार में 2 जनवरी को 'खबर कानून मौजूद पर सुविधा नदारत, दिव्यांगों के लिए सुगमता सिर्फ फाइलों तक सीमित' हेडिंग से प्रमुखता से प्रकाशित बोले लखीसराय कॉलम का असर दिखने लगा है। खबर को गंभीरता से लेते हुए डीएम मिथिलेश मिश्र ने संज्ञान लिया और 24 घंटे के भीतर दिव्यांगजनों से जुड़ी सभी बुनियादी सुविधाएं बहाल करने का निर्देश दिया है। डीएम ने आईसीडीएस डीपीओ बंदना पाण्डेय को निर्देश देते हुए कहा है कि दिव्यांगजनों को सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और बैंकों में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए डीएम ने बैंक के एलडीएम से समन्वय स्थापित कर सभी प्रमुख बैंकों में दिव्यांगों के लिए अलग से काउंटर खोलने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें लंबी कतारों में खड़ा न होना पड़े।

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इसके साथ ही सदर अस्पताल में यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर अलग से काउंटर लगाने का आदेश दिया है। डीएम ने कहा है कि दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र या अन्य किसी दस्तावेज़ के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े, इसके लिए संबंधित कर्मी स्वयं दिव्यांगों के पास जाकर उनके कार्यों को सुगम बनाएंगे। वहीं सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर रैंप की सुविधा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। हिन्दुस्तान अखबार में प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से दिव्यांगजनों में संतोष देखा जा रहा है। दिव्यांगजनों ने अखबार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं को आवाज मिली है। इस संबंध में दिव्यांग ओम स्नेही ने कहा कि जैसे ही खबर प्रकाशित हुई, हम लोग हिन्दुस्तान अखबार लेकर डीएम के पास पहुंचे। उन्होंने खबर को ध्यान से देखा और बिना किसी देरी के तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि यदि समस्याएं सही तरीके से सामने लाई जाएं तो समाधान भी संभव है। हिन्दुस्तान की इस खबर ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि पत्रकारिता के माध्यम से जनसमस्याओं का समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।