पंचायती राज में भी नहीं बदल सका बतसपुर गांव की तस्वीर
डेढ़ हजार की आबादी बाले गांव को अच्छे दिन का इंतजार किउलडेढ़ हजार की आबादी बाले गांव को अच्छे दिन का इंतजार किउल

चानन, निज संवाददाता। गांव की तस्वीर व तकदीर बदलने का प्रयास पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है, बावजूद गांवों का समुचित विकास संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसा ही उदाहरण जानकीडीह पंचायत के बतसपुर गांव का है। यहां सरकार की तमाम योजनाएं महज कागजी घोड़ा बनकर रह गया है। गांव में जहां -तहां बिखरे कूड़े स्वच्छता अभियान की हवा निकाल रही है। यहां रह रही आबादी को समग्र विकास का अब भी इंतजार है। कहने को तो पंचायत मुखिया धुरो देवी द्वारा पीएम आवास, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन सहित अन्य विकास कार्यों को तवज्जों दिया जा रहा है, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहने से सड़क पर हमेशा पानी जमा रहता है।
करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले इस गांव में जल निकासी की समस्या वर्षों से गंभीर बना हुआ है। जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ ही हर घर नल जल योजना का हाल भी ठीक नहीं है। गांव में सरकारी स्कूल भी है, लेकिन विषयवार शिक्षक नहीं रहने से शिक्षा का हाल भी बेहाल है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी गांव पिछड़ा हुआ है। गांव में उपस्वास्थ्य केन्द्र नहीं रहने से लोगों को ग्रामीण चिकित्सक के सहारे रहना पड़ रहा है। नल जल का हाल भी ठीक नहीं: मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट हर घर नल जल का हाल भी ठीक नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी में हर घर नल जल योजना से पानी घरों तक नहीं पंहुच पा रहा था। अधिकांश लोग घर में लगे चापाकल पर निर्भर रहे । जागरूकता की कमी से कूड़ा उठाव भी नहीं हो रहा है। वहीं मुखिया धुरो देवी ने कहा कि पंचायत के अधिकांष वार्डो में हर घर नल जल योजना को सुदृढ़ कराने को लेकर वरीय अधिकारी को अवगत कराया गया है। जल निकासी की व्यवस्था भी सुदृढ़ की जएगी।
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