सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर जोर, सख्त कानून बनाने की मांग

Newswrap हिन्दुस्तान, लखीसराय
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एडवोकेट सिरीश कुमार शांडिल्य ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी सरकारी कर्मियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य की जानी चाहिए।

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर जोर, सख्त कानून बनाने की मांग

कजरा, एक संवाददाता। आवाज-ए-सिरीश शांडिल्य के संस्थापक सह अध्यक्ष एडवोकेट सिरीश कुमार शांडिल्य ने देश की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर सरकारी स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि जब तक सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में ठोस और व्यापक सुधार नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से वे लगातार केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष यह मांग रखते आ रहे हैं कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाएं। उनका मानना है कि देश की बड़ी आबादी आज भी सरकारी स्कूलों पर निर्भर है, ऐसे में इन संस्थानों की स्थिति मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

प्रेस रिलीज में उन्होंने अपनी प्रमुख मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को एक सख्त कानून बनाना चाहिए, जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, न्यायाधीश, जिलाधिकारी से लेकर सभी सरकारी कर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य कर दी जाए। उनका तर्क है कि जब नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बच्चे स्वयं सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे, तब वे इन संस्थानों की वास्तविक समस्याओं को समझ पाएंगे और सुधार के लिए गंभीर पहल करेंगे। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि उनकी इस मांग पर अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाया है। हालांकि, उन्होंने पड़ोसी देश नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस दिशा में सकारात्मक पहल की गई है, जो भारत के लिए प्रेरणादायक हो सकती है। एडवोकेट शांडिल्य ने यह भी कहा कि किसी भी देश का विकास उसकी बौद्धिक संपदा पर निर्भर करता है, और यह बौद्धिक संपदा गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा से ही विकसित होती है।वर्तमान में भारत की सरकारी शिक्षा प्रणाली कई चुनौतियों से जूझ रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम (यूनिफॉर्म करिकुलम) लागू किया जाए, ताकि सभी वर्गों के बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके। इससे शिक्षा में असमानता कम होगी और समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकेंगे। अंत में, उन्होंने सरकार से अपील की कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके और भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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