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ठंड के मौसम में नवजात का रखें विशेष ध्यान

हिन्दुस्तान टीम,कोसीNewswrap
Thu, 02 Dec 2021 11:41 PM
ठंड के मौसम में नवजात का रखें विशेष ध्यान

किशनगंज। एक प्रतिनिधि

जिले में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कृत संकल्पित है। इसको लेकर सदर अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में तमाम सुविधाओं में बढ़ोतरी भी की जा रही है। नवजात शिशु की समुचित देखभाल के लिये संस्थागत प्रसव को जरूरी माना गया है। प्रसव के 48 घंटों तक मां व नवजात को अस्पताल की विशेष निगरानी में रखने की सलाह दी जाती है। बीमार बच्चों की देखभाल के लिये जिले के सदर अस्पताल में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू)एवं सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में न्यू बोर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट ( एनबीएसयू) का सफल संचालन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग गतिविधि आयोजित कर लोगों को शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहा है। सदर अस्पताल की चिकित्सक डॉ.शबनम यास्मिन ने बताया बताया कि गर्भस्थ शिशु को गर्भनाल भावनात्मक एवं शारीरिक दोनों स्तर पर जोड़ता है। गर्भस्थ शिशु को गर्भनाल के जरिए ही आहार भी प्राप्त होता है। इसलिए शिशु जन्म के बाद भी गर्भनाल के बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। बेहतर देखभाल के अभाव में नाल में संक्रमण फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है, जो गंभीर परिस्थितियों में नवजात के लिए मृत्यु का भी कारण बन जाता है।

जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना जरूरी

सदर अस्पताल महिला रोग विशेषज्ञ वरिष्ठ डॉ.उर्मिला कुमारी ने बताया कि जन्म के बाद बच्चों के शरीर को अच्छे से पोछ कर नर्म कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटें के अंदर मां का गाढ़ा पीला दूध नवजात को पिलाना जरूरी है। इसके छह माह तक बच्चों को सिर्फ स्तनपान करायें। जन्म तुरंत बाद बच्चों के वजन की माप जरूरी है। कम वजन व समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। शिशु जन्म के बाद नाल के ऊपर से किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ या क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। नाल को सूखा रखना जरूरी होता है। बाहरी चीजों के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डबल्यूएचओ के अनुसार जन्म के शुरुआती सात दिनों में होने वाली नवजात मृत्यु में गर्भनाल संक्रमण भी एक प्रमुख कारण होता है।

ठंड के मौसम में नवजात का रखें विशेष ध्यान

डीआईओ सह शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.मंजर आलम ने बताया कि ठंड के मौसम में बच्चों के बीमार होने की संभावना अधिक होती है। साथ ही प्रसवोपरांत नाल को बच्चे और मां के बीच दोनों तरफ से नाभी से 2 से 4 इंच की दूरी रखकर काटी जाती है। बच्चे के जन्म के बाद इस नाल को प्राकृतिक रूप से सूखने देना जरूरी है, जिसमें 5 से 10 दिन लग सकते हैं। शिशु को बचाने के लिए नाल को हमेशा सुरक्षित और साफ रखना आवश्यक है ताकि संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

इन बातों का रखें ख्याल:

गर्भ नाल की सफाई करते वक्त उसे हमेशा सूखा रखें ताकि संक्रमण से बचाया जा सके

नाल के ऊपर कुछ भी बाहर से नहीं लगाएं

नाल की सफाई से पहले हाथ अच्छी तरह से साबुन से धोकर सूखा लें ताकि संक्रमण नहीं फैले

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