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डीएपी की खपत के अनुपात में एक चौथाई आवंटन

हिन्दुस्तान टीम,कोसीNewswrap
Thu, 02 Dec 2021 11:51 PM
डीएपी की खपत के अनुपात में एक चौथाई आवंटन

किशनगंज। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

जिले में डीएपी की किल्लत से कालाबाजारी की आशंका बढ़ गयी है। नेपाल व बंगाल की सीमा से सटा रहने के कारण अधिकांश कारोबारी इसका बखूबी फायदा उठा कालाबाजारी को अंजाम देते हैं। यहां के किसानों को भले ही डीएपी न मिले लेकिन नेपाल व बंगाल में कारोबारी ऊंचे कीमत में बेचने की जुगत में रहते हैं। हालांकि विभाग इसके लिए पूरी तरह सख्त है। डीएओ ने कहा कि किसी दुकानदार के द्वारा कालाबाजारी की शिकायत मिली तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। जिले में रबी मौसम में किसान यहां गेहूं से अधिक मक्का की खेती करते हैं। इस बार यहां मक्का का लक्ष्य 58 हजार 605 हेक्टेयर रखा गया है। जबकि गेहूं का लक्ष्य 16 हजार हेक्टेयर है। इस सीजन में किसानों को डीएपी की ज्यादा जरुरत होती है। मक्का नगदी फसल रहने के कारण किसानों का इसकी खेती के प्रति ज्यादा रुझान है। जूट की खेती से विमुख होकर किसान मक्का की ही खेती कर रहे हैं। मक्का की बुआई के लिए किसान खेतों में डीएपी डालते हैं। लेकिन अभी जिले के पास मात्र 680.77 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध है। जिसमें थोक विक्रेता के पास 30 मीट्रिक टन खाद स्टॉक रखा गया है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो नवंबर माह में जिले को 2630 मीट्रिक टन डीएपी की जरुरत थी। लेकिन जिला को मात्र 870 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध कराया गया है। यानि मांग के अनुरुप एक चौथाई ही आवंटन हो पाया है। जिससे किसानों में त्राहिमाम की स्थिति है।

किसान डीएपी खाद नहीं मिलने के कारण मक्का की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। यूरिया का आवंटन भी मांग के अनुरुप कम हुआ है। नवंबर माह में यूरिया की मांग जिले में 5320 मीट्रिक टन के बदले 920.625 मीट्रिक टन आवंटन ही हुआ है। अब दिसंबर माह शुरु हो चुका है। लेकिन जिले में अब भी कई प्रखंडों में गेहूं व मक्का की बुआई नहीं शुरु हो पायी है। अब भी खेतों में धान की फसल कटाई व दौनी का काम चल रहा है। अक्टूबर माह में आए जोरदार बारिश के कारण यहां धान के खेतों में पानी भर गया था। धान की फसलें बर्बाद हुई थी। यही वजह रही रबी फसल की बुआई में विलंब हो रहा है।

कृषि विभाग ने भेजा त्राहिमाम संदेश

जिले में डीएपी की कमी को लेकर कृषि विभाग द्वारा मुख्यालय को त्राहिमाम संदेश भेजा गया है। जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा ने बताया कि पूरे राज्य में ही डीएपी की कमी है। डीएपी आयातित खाद है। इसलिए राज्य में ही इसका आवंटन कम हुआ है। इन्होंने बताया कि विभाग के मंत्री महोदय व प्रधान सचिव के साथ हुई वीसी में जिले में खाद की कमी से अवगत करा दिया गया है। मंत्री महोदय व प्रधान सचिव के द्वारा जिले को इस बार डीएपी खाद का अधिक आवंटन देने का आश्वासन दिया गया है। राज्य सरकार ने केंद्र से एक लाख मीट्रिक टन डीएपी खाद के आवंटन की मांग की है।

इन्होंने कहा कि एक सप्ताह या दस दिन के अंदर डीएपी खाद का आवंटन हो जाने की उम्मीद है। जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि जिले में 680.77 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। जिसमें थोक विक्रेता के पास 30 मीट्रिक टन स्टॉक में रखा गया है। जिस ब्लॉक में कम खाद होगा वहां थोक विक्रेता से लेकर खाद की आपूर्ति की जाएगी। थोक विक्रेता बिना अनुमति के किसी को खाद नहीं देंगे।

डीएपी का विकल्प एनपीके या एसएसपी

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि किसान डीएपी के बदले एनपीके या एसएसपी खेत में डालेंगे तो कोई अंतर नहीं आएगा। एनपीके में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटाश तीनों मिलता है। जबकि एसएसपी में फॉस्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है। इसलिए किसान इस भ्रम में न रहें कि डीएपी ही डालेंगे तो मेरा फसल अच्छा होगा।

फोटो 02 दिसंबर केगंज 15 : डीएपी खाद का बोरा

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